छत्तीसगढ़ में हाथियों की संख्या 240 से बढ़कर 450, राष्ट्रीय कार्यशाला में संरक्षण पर मंथन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वर्चुअल माध्यम से किया। उनके निवास कार्यालय से आयोजित कार्यक्रम में वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय भी उपस्थित रहे। कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक और वन अधिकारी शामिल हुए।

संरक्षण प्रयासों का दिखा सकारात्मक परिणाम

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। राज्य सरकार के सतत संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। वर्ष 2022 में प्रदेश में लगभग 240 हाथी थे, जिनकी संख्या बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 हो गई है। उन्होंने इसे वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि बताया।

मानव-हाथी संघर्ष कम करना बड़ी चुनौती

वन मंत्री ने कहा कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई इलाकों तक फैल चुका है। ऐसे में हाथियों के संरक्षण के साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनभागीदारी, सतत निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक रणनीति पर जोर

कश्यप ने बताया कि हाथियों के संरक्षण के लिए सरकार दीर्घकालिक और वैज्ञानिक रणनीति के तहत काम कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रशिक्षित मानव संसाधनों की मदद से वन्यजीव प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं अधिकारियों और कर्मचारियों को नवीनतम जानकारी और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराती हैं।

विशेषज्ञ देंगे स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रशिक्षण

कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, स्वास्थ्य परीक्षण, नमूनों का संरक्षण, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

वन्यजीव संरक्षण में मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़

वन मंत्री ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव हाथियों के संरक्षण, सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक मजबूत मॉडल राज्य के रूप में उभर रहा है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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