किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर खंडवा में देशभर से पहुंचे फैंस, समाधि पर दूध-जलेबी का भोग लगाकर दी श्रद्धांजलि

महान गायक किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर मंगलवार 13 अक्टूबर को उनके गृह नगर खंडवा में सुबह से ही प्रशंसकों की आवाजाही रही। किशोर दा की समाधि पर पहुंचे लोगों ने उन्हें अपने-अपने अंदाज में याद किया। कई प्रशंसक उनके गीत गुनगुनाते नजर आए तो कुछ ने दूध-जलेबी का भोग लगाकर श्रद्धांजलि दी। किशोर कुमार की गायकी से जुड़ी यादों और उनके प्रति लोगों के लगाव ने समाधि स्थल को संगीत प्रेमियों के मिलन का केंद्र बना दिया।

दरअसल किशोर कुमार की खासियत सिर्फ उनकी आवाज नहीं थी। वे अपनी गायकी के साथ अभिनय और अलग अंदाज के लिए भी पहचाने जाते थे। उनके गीत आज भी अलग-अलग उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। यही वजह है कि उनकी पुण्यतिथि पर खंडवा में जुटे प्रशंसकों के लिए यह दिन केवल याद करने का मौका नहीं बल्कि अपने प्रिय कलाकार से भावनात्मक जुड़ाव जताने का अवसर भी रहा।

2007 से हर साल आ रहे सतीश

किशोर कुमार के प्रति लोगों का लगाव महाराष्ट्र के परतवाड़ा से पहुंचे सतीश अम्भोर की कहानी में साफ दिखाई देता है। सतीश बताते हैं कि वे 1981 से किशोर दा के प्रशंसक हैं और उन्हें अपना गुरु मानते हैं। वर्ष 2007 से वे हर साल किशोर कुमार की पुण्यतिथि पर खंडवा पहुंचते हैं। उनके घर में किशोर दा की तस्वीर लगी है जिसकी वे रोज पूजा करते हैं। उनके लिए किशोर कुमार केवल एक गायक नहीं बल्कि जीवन में प्रेरणा देने वाले व्यक्तित्व हैं।

दरअसल किशोर दा को दूध-जलेबी पसंद थी। इसी वजह से उनके जन्मदिन 4 अगस्त और पुण्यतिथि 13 अक्टूबर पर समाधि स्थल पर दूध-जलेबी का भोग लगाने की परंपरा निभाई जाती है। प्रशंसक इस परंपरा के जरिए अपने चहेते कलाकार की पसंद को याद करते हैं। समाधि पर आने वाले लोग फूल चढ़ाने के साथ उनके गीत भी गुनगुनाते हैं और उनसे जुड़ी यादें साझा करते हैं। खंडवा के स्थानीय प्रशंसक अतुल अत्रीवाल किशोर कुमार के गीतों में जीवन के अलग-अलग रंग देखते हैं। उनका मानना है कि उनके गीत कभी हंसना सिखाते हैं तो कभी मुश्किल वक्त से आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। यही जुड़ाव किशोर दा की गायकी को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है।

शाम को हुआ संगीतमय कार्यक्रम

वहीं खरगोन से पहुंचे विनय कुमार जोशी भी किशोर कुमार के बड़े प्रशंसक हैं। वे पिछले 51 वर्षों से 13 राज्यों में किशोर दा के गीत गाकर उनकी गायकी को लोगों तक पहुंचा रहे हैं। गीतों के प्रति उनके समर्पण के चलते प्रशंसकों ने उन्हें ‘झुमरू’ नाम दिया है। विनय ने अपने मकान का नाम भी ‘झुमरू’ रखा है। उनके लिए किशोर कुमार के गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने वाली संगीत साधना हैं। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि किशोर कुमार देश-विदेश में कहीं भी कार्यक्रम करते थे तो अपनी पहचान ‘मैं खंडवा वाला किशोर कुमार’ कहकर कराते थे। अपने गृह नगर के प्रति उनका लगाव हमेशा खास रहा। प्रशंसकों की मांग पर उनकी याद में समाधि बनाई गई जो आज उनके चाहने वालों के लिए श्रद्धांजलि देने का प्रमुख केंद्र है।

समाधि स्थल की व्यवस्था को लेकर नगर निगम के जल विभाग प्रभारी राजेश यादव ने बताया कि निगम हर महीने यहां साफ-सफाई, रंग-रोगन और सुरक्षा की व्यवस्था करता है। पुण्यतिथि पर आने वाले लोगों की सुविधा के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए। शाम को संस्कृति विभाग की ओर से संगीतमय कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें किशोर कुमार के लोकप्रिय गीतों के जरिए उन्हें याद किया गया।

सुशील विधानी, खंडवा

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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