बीमा कंपनी को 16.50 लाख रुपए देने का आदेश, बेटे की मौत के बाद टूटे पिता को मिला न्याय

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 16.50 लाख रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह आदेश उस मामले में दिया गया है, जिसमें बीमा कंपनी ने बीमा दावा खारिज कर दिया था। आयोग ने माना कि पिता द्वारा देरी से बीमा दावा करना उनके मानसिक सदमे की वजह से हुआ, इसलिए कंपनी का दावा खारिज करना अनुचित था।
मामला 3 फरवरी 2022 का है, जब कोरबा के एनटीपीसी साडा कॉलोनी, जमनीपाली निवासी जयेश रोहन बेन अपने साथी के साथ बुलेट (CG-12-AP-8777) से दुर्ग के महाराजा चौक से बोरसी रोड की ओर जा रहे थे। रास्ते में सामने से आ रही बाइक (CG-24-J-4140) ने तेज रफ्तार में टक्कर मार दी। इस हादसे में जयेश की मौके पर ही मौत हो गई।
जयेश की बाइक यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से Compulsory Personal Accident (Owner-Driver) पॉलिसी के तहत बीमित थी। बीमा अवधि 7 अक्टूबर 2021 से 6 सितंबर 2022 तक थी। मृतक के पिता इस पॉलिसी में नॉमिनी थे। बेटे की मौत और कुछ माह पहले पत्नी की मृत्यु के कारण पिता गहरे सदमे में चले गए और दो साल तक अवसाद में रहे।
उन्होंने 6 फरवरी 2024 को 15 लाख रुपए के बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया। जांच में हादसे की पुष्टि हुई, पॉलिसी वैध पाई गई और सभी शर्तें पूरी थीं। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने 18 मार्च 2025 को आवेदन खारिज कर दिया। कंपनी ने दावा किया कि पिता ने घटना की सूचना देने में दो साल की देरी की है।
आयोग ने सुनवाई में पाया कि देरी उचित कारणों से हुई थी और पिता का मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी। इसलिए आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को कुल 16.50 लाख रुपए अदा करने का आदेश दिया है। इसमें 15 लाख रुपए बीमा राशि, 50 हजार रुपए मानसिक क्षति, 50 हजार आर्थिक क्षति और 50 हजार रुपए वाद व्यय शामिल हैं।
इस फैसले के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों को संवेदनशील मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, खासकर तब जब पीड़ित व्यक्ति गहरे सदमे से गुजर रहा हो।











