नए साल से डिजिटल होगी जमीन से जुड़ी प्रक्रिया, बिहार में ऑनलाइन मिलेंगे सभी भू-अभिलेख

बिहार में नए साल की शुरुआत के साथ ही जमीन से जुड़े कामकाज में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार एक जनवरी से भूमि संबंधी सभी दस्तावेजों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने जा रही है। इस फैसले के बाद आम लोगों को अब भू-अभिलेख के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, अब तक जमीन के दस्तावेजों के लिए स्टांप शुल्क, अभिप्रमाणित प्रति और अन्य कागजात हासिल करने में लोगों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। ऑफलाइन व्यवस्था के कारण कई बार एक से दो सप्ताह तक का समय लग जाता था। नई डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो जाएगी और आवेदन के साथ ही डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रति उपलब्ध हो सकेगी।
विभाग का कहना है कि भू-अभिलेख पोर्टल पर सभी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी उपलब्ध रहेगी। निर्धारित शुल्क के भुगतान के बाद आवेदक तुरंत डिजिटल प्रति डाउनलोड कर सकेंगे। इससे जमीन की खरीद-बिक्री, ऋण लेने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं में आसानी होगी।
इस पहल से किसानों को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। दस्तावेज समय पर मिलने से न सिर्फ कामकाज तेज होगा, बल्कि पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल प्रतियां पूरी तरह मान्य होंगी और अभिप्रमाणित कॉपी के लिए अलग से स्टांप या कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। यदि किसी दस्तावेज की प्रति पोर्टल पर उपलब्ध नहीं होती है, तो उसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी दी जाएगी, जिसके बाद संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।
राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम भूमि प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक बनाने और आम लोगों को बेहतर सुविधा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।











