राजस्थान: कानफोड़ू डीजे और अवैध विवाह स्थलों का मामला गरमाया, कोर्ट में पेश हुए गार्डन संचालक; जज बोले- 10 बजे बाद डीजे बजा तो…

डीडवाना कुचामन: कुचामन सिटी की घनी आबादी में संचालित विवाह स्थलों और देर रात तक बजने वाले डीजे को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय में लगातार गर्माता जा रहा है. मंगलवार को न्यायालय के आदेश पर नगर परिषद आयुक्त, पुलिस प्रशासन और कई मैरिज गार्डन संचालक ताल्लुका विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल के समक्ष उपस्थित हुए.

मानवाधिकार सुरक्षा संगठन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मुन्नालाल काछवाल की ओर से दायर प्री-लिटिगेशन प्रकरण में सरला बिरला कल्याण मंडपम, नर्मदा गार्डन, न्यू माहेश्वरी भवन, गोदावरी गार्डन, बसंत कुमार बिरला बारात भवन और कोठारी भवन के व्यवस्थापक, नगर परिषद आयुक्त शिंकेश कांकरिया तथा थानाधिकारी सतपाल सिंह न्यायालय में पेश हुए.

गौरतलब है कि 9 मार्च को ही न्यायालय की ओर से सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर 10 मार्च को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद 9 मार्च को देर रात तक शहर में डीजे बजते रहे, यहां तक कि पुलिस थाने के आसपास भी डीजे की आवाज गूंजती रही, जिस पर न्यायालय में सवाल उठाए गए.

सुनवाई के दौरान सरला बिरला कल्याण मंडपम के व्यवस्थापक राजकुमार सोढानी ने कहा कि वे विवाह आयोजकों को रात 10 बजे तक ही डीजे की अनुमति देते हैं, लेकिन कई बार आयोजक किसी अधिकारी या नेता से फोन करवा कर देर तक डीजे बजाने की सिफारिश करवा देते हैं, जिससे उन्हें भी परेशानी होती है.

इस जवाब पर न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन है कि रात 10 बजे के बाद किसी भी हालत में डीजे नहीं बजना चाहिए. यदि नियमों का पालन नहीं हुआ तो भवन सीज करने जैसी कार्रवाई भी करनी पड़ सकती है.

प्रार्थी मुन्नालाल काछवाल ने न्यायालय को बताया कि अधिकांश विवाह स्थलों में पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे समारोह में आने वाले लोग सड़कों पर वाहन खड़े कर देते हैं. इससे आसपास के रहवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है और आपात स्थिति में एंबुलेंस तक के लिए रास्ता नहीं बचता.

न्यायालय ने इस पर विवाह स्थल संचालकों को निर्देश दिए कि जिन भवनों में पार्किंग व्यवस्था नहीं है, वे जल्द से जल्द समुचित पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करें.

प्रार्थी पक्ष के अधिवक्ता ओमप्रकाश पारीक ने न्यायालय को बताया कि नगर परिषद से यदि इन सभी विवाह स्थलों की निर्माण स्वीकृति पत्रावलियां मंगवाकर जांच की जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि कई भवन स्वीकृत नक्शे के अनुरूप बने ही नहीं हैं और अधिकांश जगह पार्किंग सिर्फ कागजों में ही दर्शाई गई है.

अधिवक्ता पारीक ने जिला परिवहन अधिकारी डीडवाना और आरटीओ को भी आवश्यक पक्षकार बनाने का निवेदन किया, जिस पर न्यायालय ने दोनों अधिकारियों को भी प्रकरण में पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी कर दिया.

सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि विवाह स्थल संचालक, प्रशासन और प्रार्थी पक्ष पुलिस थाना कुचामन में बैठक कर स्पष्ट निर्णय लें कि किसी भी विवाह स्थल पर रात 10 बजे के बाद डीजे नहीं बजेगा और ध्वनि स्तर ऐसा रखा जाएगा जिससे ध्वनि प्रदूषण न हो और आमजन को असुविधा न हो. मामले की अगली सुनवाई के लिए न्यायालय ने सभी पक्षकारों को 16 मार्च को पुनः उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं.

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