RDVV कुलसचिव ने मांगी सुरक्षा, निलंबित चौकीदार से बताया खतरा, दो बार कुलगुरु को लिखा पत्र, जवाब नहीं मिलने का किया दावा


रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) जबलपुर में कुलसचिव और निलंबित चौकीदार से जुड़ा मामला सामने आया है। दरअसल कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा को पत्र लिखकर कार्यालय और निवास पर सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निलंबित चौकीदार रविंद्र तिवारी से उन्हें नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर डॉ. सोनवाल को कुलसचिव और प्रो. राजेश कुमार वर्मा को कुलगुरु बताया गया है।
वहीं कुलसचिव ने अपने पत्रों में चौकीदार के पहले के व्यवहार का भी जिक्र किया है। 21 सितंबर को रविंद्र तिवारी को कुलसचिव कार्यालय में अभद्रता और हाथापाई के आरोपों के बाद निलंबित किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके निलंबन के साथ मुख्यालय कटनी स्थित व्यंकटेश लाइब्रेरी तय किया था।
कुलसचिव ने दो बार मांगी सुरक्षा
दरअसल डॉ. सोनवाल ने 21 सितंबर के पत्र में बताया कि रविंद्र तिवारी को कथित कदाचरण के मामले में निलंबित किया गया है। उनके अनुसार, तिवारी पहले भी नशे की हालत में कुलसचिव कार्यालय पहुंच चुका था। उस दौरान कर्मचारियों ने बीच-बचाव कर उसे समझाकर वापस भेजा था। इसी घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके खिलाफ कार्रवाई की थी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय कार्यालय में हुई इस घटना के बाद तिवारी को निलंबित कर दिया गया था।

साथ ही कुलसचिव ने अपने पत्र में पूर्व सहायक कुलसचिव पवन साहू के साथ हुए कथित विवाद का भी जिक्र किया है। पत्र के अनुसार, तिवारी और पवन साहू के बीच झूमाझटकी, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया था। कुलसचिव ने यह भी दावा किया कि तिवारी ने पवन साहू के घर जाकर विवाद किया और दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया था। इन आरोपों से जुड़े मामलों की जांच का भी पत्र में उल्लेख किया गया है। कुलसचिव ने कहा कि वह जबलपुर में अकेले रहते हैं और निलंबन के बाद उन्हें अपने खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई या नुकसान पहुंचाए जाने की आशंका है। उन्होंने कार्यालय के साथ अपने निवास पर भी सुरक्षा देने की मांग की।
कार्रवाई नहीं होने की बात कही
दरअसल 21 सितंबर को सुरक्षा की मांग करने के बाद डॉ. सोनवाल ने 24 सितंबर को कुलगुरु को दोबारा पत्र भेजा। इसमें उन्होंने पहले आवेदन पर अब तक कोई कार्रवाई या आदेश नहीं होने की बात कही। उन्होंने लिखा कि घटना के बाद से वह डर और तनाव में हैं और इसका असर कार्यालय के काम पर भी पड़ रहा है। सुरक्षा की मांग वाले दोनों पत्रों की प्रतियां सिविल लाइन थाना प्रभारी, उच्च शिक्षा विभाग के अपर सचिव और कुलगुरु के निज सचिव को भी भेजी गई हैं। इस पूरे मामले की रिपोर्टिंग में यह भी सामने आया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने चौकीदार को निलंबित करने के साथ उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी।
इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कर्मचारी नेता और पूर्व महासचिव राजेंद्र शुक्ला को भी नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है। नोटिस में आरोप लगाया गया कि उन्होंने समाचारों की कटिंग वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट कर कुलसचिव की छवि खराब करने का प्रयास किया। उनसे दो दिन में लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।











