ईरान को रूस दे रहा अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सूचना? ट्रंप बोले- पुतिन से पूछूंगा

अमेरिका से जंग में ईरान को मिली रूसी मदद को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के दावे पर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम पता लगाएंगे कि यह सच है या नहीं. मैं पुतिन से इस बारे में पूछूंगा. उन्होंने कहा कि अगर रूस ने मदद की भी है तो उसका कोई असर नहीं हुआ है, क्योंकि हमने ईरान को बुरी तरह हराया है.
दरअसल यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के दावा किया था कि रूस मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ईरान को सैटेलाइट सर्विलांस की जानकारी देकर मदद कर रहा है. इस पर ट्रंप ने कहा कि रूस ने वेनेजुएला को बहुत सारे उपकरण दिए थे. वेनेजुएला के पास रूस के ही सारे उपकरण थे. उसका क्या नतीजा निकला?
रूस की मदद का कोई खास असर नहीं
ट्रंप ने कहा, हो सकता है कि रूस ईरान की मदद कर रहा हो, लेकिन अगर कर भी रहा है, तो उसका कोई असर नहीं हुआ है. क्योंकि ईरान के पास न तो सेना है, न एयर फोर्स है, न नेवी है, उनके पास कुछ भी नहीं है. मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा कर रहे हैं, कम से कम बड़े स्तर पर तो बिल्कुल नहीं. और अगर उन्होंने ऐसा किया भी है, तो उसका कोई खास असर नहीं हुआ है.
ट्रंप से मुलाकात करेंगे नेतन्याहू
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आज वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन रविवार को ईरान पर अपने हमले रोक दिए, वहीं तेहरान ने भी कहा कि उसने भी जवाबी कार्रवाई फिलहाल रोक दी है.
परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का दबाव
नेतन्याहू ने कहा कि वह ट्रंप के उन प्रयासों का पूरी तरह समर्थन करते हैं, जिनका उद्देश्य ईरान को कमजोर करना और उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए दबाव बनाना है. उन्होंने कहा कि यदि वह बिना दोबारा बड़े सैन्य संघर्ष के यह लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, तो इसमें बुराई क्या है?इजराइली प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि वह ट्रंप के सामने कोई नयी जानकारी नहीं रखेंगे, बल्कि अपने अच्छे मित्र ट्रंप की योजनाओं को सुनेंगे.
उन्होंने कहा कि कई मायनों में अंतिम फैसला उन्हीं का होगा. हालांकि नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने भविष्य में सीधे या अपने सहयोगी संगठनों के जरिए इजराइल पर दोबारा हमला किया, तो यह उसकी बहुत बड़ी गलती साबित होगी. इस घटनाक्रम के बीच दोनों देशों को अंतरिम युद्धविराम समझौते पर बातचीत की मेज पर वापस लाने के प्रयास जारी हैं. हालांकि हाल के दिनों में हुए हमलों और जवाबी हमलों ने इस समझौते को काफी हद तक कमजोर कर दिया है.
बातचीत के लिए समय देना चाहते हैं ट्रंप
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के लिए कुछ समय देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप वार्ता को थोड़ा और वक्त देना चाहते हैं. पिछले कुछ हफ्तों से, विशेषकर पिछले कुछ दिनों में ओमान, ईरान और हमारे अन्य वार्ताकार वरिष्ठ स्तर से लेकर तकनीकी स्तर तक लगातार संपर्क में हैं.
वाल्ट्ज ने इस आशंका को खारिज किया कि ईरानी हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार कम पड़ रहा है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों के लिए लंबे समय तक इस तरह के सैन्य अभियान जारी रखना आसान नहीं होगा.
ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू
नेतन्याहू और ट्रंप की पिछली मुलाकात फरवरी में हुई थी, जिसके कुछ ही हफ्ते बाद ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू हुआ था. इस युद्ध में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हो गई थी. युद्ध शुरू होने के दो दिन बाद ईरान समर्थित हिजबुल्ला ने इजराइल पर हमला किया था, जिसके जवाब में इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई की. इसके बाद अमेरिका ने लेबनान और इजराइल के बीच प्रत्यक्ष वार्ता को समर्थन दिया ताकि सीमा पर तनाव कम किया जा सके और हिजबुल्ला को निरस्त्र करने का रास्ता निकाला जा सके.











