SIR विवाद: चिराग पासवान के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने भी की ये डिमांड, चुनाव आयोग ने क्या कहा?

विशेष मतदाता पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) और चुनाव आयोग में कथित मतभेद को लेकर विवाद काफी बढ़ गया है. अब इस विवाद ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि SIR से पहले ही वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ की गई और SIR के जरिए उन कथित गड़बड़ियों को मिटाने की कोशिश की जा रही है. साथ ही उन्होंने वोट चोरी का भी आरोप लगाया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. अब इस विवाद में बीजेपी के सहयोगी दलों के नेताओं के भी बयान आने शुरू हो गए हैं, जिससे मामला पूरी तरह राजनीतिक बन गया है.
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा है, ‘एसआइआर से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है. इस विषय को एड्रेस करने की जरूरत है और कन्फ्यूजन दूर करने के लिए चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए’. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ ऐसे सवाल उठाए जा रहे हैं, तो मेरा मानना है कि चुनाव आयोग और खासकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की भी यह जिम्मेदारी है कि वह अपना पक्ष मजबूती से रखें. विपक्ष क्या कहता है, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि राजनीति करना उनका काम है.
उपेंद्र कुशवाहा ने CEC को लेकर क्या कहा?
वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने भी कुछ इसी तरह से बयान दिया है. उन्होंने भी कहा कि EVM से जुड़े विवाद को लेकर जनता के बीच काफी भ्रम पैदा हो गया है और इस मामले पर ध्यान देने की जरूरत है. इस भ्रम को दूर करने के लिए चुनाव आयोग को तुरंत सही स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए.
एस आइ आर से संबंधित विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति पैदा हो गई है। विषय को एड्रेस करने की जरूरत है। कंफ्यूजन दूर करने हेतु चुनाव आयोग के द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए। @ECISVEEP
— Upendra Kushwaha (@UpendraKushRLM) September 25, 2026
SIR पर चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
अब चुनाव आयोग ने इसपर स्पष्टीकरण जारी किया है और कहा कि चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त, सभी ने मिलकर बिहार के लिए SIR ऑर्डर, असम के SIR ऑर्डर, 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR ऑर्डर और 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR ऑर्डर को मंजूरी दी है. मंजूर किए गए SIR ऑर्डर में नए वोटरों को जोड़ने के लिए फॉर्म 6 के साथ जमा किया जाने वाला डिक्लेरेशन फ़ॉर्म भी शामिल है, ताकि कागजी काम कम हो और नागरिकों को आसानी हो. यह लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 (RP Act 1950) की धारा 21(3) के मुताबिक है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया है.
क्या है विवाद की वजह?
दरअसल, इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों, विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म 6 में बदलावों को अवैध और अनाधिकृत बताया है और नए मतदाताओं के हित में इन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता वाले आयोग ने इसी साल जुलाई में फॉर्म 6 में बदलावों को शामिल किया था. हालांकि CEC के इसी कदम और चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट ने हंगामा खड़ा कर दिया है.
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