चुनाव आयोग में ‘मतभेद’, NDA में भी सवाल… क्यों खामोश हैं ज्ञानेश कुमार?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को विपक्ष ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया. बिहार, यूपी, दिल्ली, असम और पंजाब से लेकर जम्मू कश्मीर तक दिनभर बवाल होता रहा. मुख्य रूप से ये प्रदर्शन कांग्रेस का माना जा रहा है. पार्टी के वरिष्ठ नेता से कार्यकर्ता तक सड़कों पर उतर आए.
बिहार की राजधानी पटना में जहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन के दौरान पुलिस से सामना हुआ. उन पर पानी की बौछार की गई लेकिन वो डटे रहे. हाथों में झंडे-बैनर और पोस्टर के साथ वो खड़े रहे. वहीं पटना के इस प्रोटेस्ट में कांग्रेस की सहयोगी RJD भी शामिल हुई. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन कार्यक्रम किया.
वहीं चंडीगढ़ में तो पंजाब और हरियाणा यानी दो राज्यों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया. चुनाव आयोग के दफ्तर के घेराव का प्रयास किया. यहां प्रशासन ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को वाटर कैनन चला कर खदेड़ा गया. ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के गुस्से की तस्वीरें यूपी की राजधानी लखनऊ से भी आईं. वहां तो तेज बारिश में भी पार्टी वर्कर डटे रहे और पीछे नहीं हटे. पुलिस के साथ नेताओं की बहस भी हुई. बाद में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में भी लिया गया.
दिल्ली में यूथ कांग्रेस ने मोर्चा संभाला. हाथों में हथकड़ी और पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया. ये कहा गया कि जब तक ज्ञानेश कुमार को जेल नहीं भेजा जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा. दिल्ली में प्रदर्शन के चलते सुबह से ही चुनाव आयोग के हेडक्वॉर्टर पर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई थी. दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जवान बिल्डिंग के बाहर तैनात किए गए थे. इसी तरह असम के गुवाहाटी और हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रोटेस्ट किया गया. शिमला में हिमाचल निर्वाचन आयोग के बोर्ड को तोड़ने की कोशिश की गई.
वहीं जम्मू कश्मीर में सड़कों पर तो विरोध हुआ ही, विधानसभा के अंदर भी ये मुद्दा उठ गया. सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने ज्ञानेश कुमार का मुद्दा उठाया. काले कपड़े लहराए और उनके इस्तीफे की मांग की. इस दौरान काफी देर तक सदन में हंगामा होता रहा.
ज्ञानेश कुमार पर ये आरोप है कि वो अपने चुनाव आयुक्तों की नहीं सुनते और अपनी मर्जी से फैसले लेते हैं. सहयोगियों की आपत्तियों को दरकिनार कर देते हैं. गुरुवार को इसी मुद्दे पर राहुल गांधी ने वीडियो प्रजेंटेशन दिया जिसके बाद आज कांग्रेस का ये रूप दिखा. उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग जोर पकड़ती जा रही है. CJP के अल्टीमेटम में भी 24 घंटे ही बचे हैं. लगातार तीन दिन से देश की राजनीति का फोकस ज्ञानेश कुमार पर है. विपक्ष आक्रामक है तो बीजेपी भी उनके बचाव में दिख रही है.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कटाक्ष किया कि ज्ञानेश कुमार का गुप्त मिशन अब गुप्त नहीं रहा. उधर बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने CEC के लिए पद्म भूषण की मांग कर दी. ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा दें और SIR पर फिर से विचार हो. वहीं NDA में सहयोगी और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मांग की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त की जिम्मेदारी है कि वो अपना पक्ष मजबूती से रखें.
चिराग के अलावा NDA के ही एक और सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने भी सवाल उठाया है. अपने X पोस्ट पर उन्होंने लिखा कि SIR विवाद पर जनता में काफी उलझन की स्थिति है. विषय को एड्रेस करने की जरूरत है. कंफ्यूजन दूर करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा अविलंब सही स्थिति पर स्पष्टीकरण आना चाहिए. यानी अब तक विपक्ष जवाब मांग रहा था और अब एनडीए में भी वैसे ही सुर सुनाई देने लगे हैं.
वहीं नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग के कमिश्नर, एक बात आप अच्छी तरह समझ लीजिए. भारत के युवा संविधान की रक्षा करेंगे, आपको एक्सपोज करेंगे. वोट चोरी नहीं होने देंगे, लोकतंत्र को प्रोटेक्ट करेंगे. 3D वाले चश्मे पहन के देखते रहिए क्या होता है.
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी और एनडीए का मुकाबला नहीं कर सकते. कुछ लोगों ने तो कल आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ भी बात की है. समाचार पत्रों में जो कुछ भी प्रकाशित होता है, वो उनके स्रोतों पर आधारित होता है और समाचार पत्रों को ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित करने का अधिकार है. लेकिन क्या वो स्वयं में अंतिम या निर्णायक प्रमाण बन जाता है?
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि मुझे दुख है, ये बहुत ही पुराना और कमजोर तर्क है. यहां तथ्य हैं, यहां साक्ष्य हैं. पूरा देश इसे देख सकता है. मेरे भाई (राहुल गांधी) ने इसे दिखाया है. वो कई अलग-अलग पत्रकार सम्मेलनों में सबूत सामने रख चुके हैं. अब ये बिल्कुल साफ है कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं. ये एक लचर कमजोर बहाना है और बीजेपी को ऐसे लचर बहाने बनाना बंद करना चाहिए.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक बयानों के तीर तो खूब चल रहे हैं. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि चुनाव आयोग में चुप्पी क्यों है. वो अपना पक्ष सामने आकर क्यों नहीं रख रहा. मुख्य चुनाव आयुक्त पर तारीखों के साथ इतने गंभीर आरोप लगे हैं लेकिन तीन दिन तक कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं. या तो प्रेस रिलीज आ रही है या फिर सूत्रों के हवाले से सफाई. बीजेपी जरूर बचाव कर रही है लेकिन चुनाव आयोग सामने आकर सफाई क्यों नहीं दे रहा. आखिर इस चुप्पी का मतलब क्या समझा जाए.
कानूनी प्रक्रिया और नियम कायदे तो खूब बताए जा रहे हैं लेकिन जो आरोप लगे हैं उन पर कुछ क्यों नहीं कहा जा रहा. चुनाव आयोग भले ही अभी खामोश है. ज्ञानेश कुमार भले ही मौन हैं लेकिन चुनाव आयोग के पूर्व अफसर इस पर खुलकर बोल रहे हैं.
पूर्व CEC ओपी रावत ने कहा कि अगर इलेक्शन कमीशन इस तरह का मौका देता है तो राजनीति तुरंत सिर उठाने लगती है. अगर इस मामले में भी वो पूरे फैक्ट्स लेकर पहले ही दिन जिस दिन ये उभरा था उस दिन ही सब बताकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने पब्लिक को बता देते तो कुछ नहीं होता लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
रावत ने कहा कि अगर दो लोग बहुमत में हैं, अगर उनकी राय के खिलाफ फैसला हो रहा है तो चिट्ठी पत्री करने से क्या फायदा? आप फैसला करिए ना. जो सही है वो कीजिए. जो आप सही मानते हैं वो कीजिए. उन्होंने वो नहीं किया. दूसरा उन्होंने क्या किया कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखी. इससे क्या संकेत मिलता है कि आप अब भी सरकार के अधीन काम करते हैं. नहीं.. चुनाव आयोग राष्ट्रपति के अधीन काम करती है सरकार के नहीं.











