एक गणपति के लिए एकजुट पूरा गांव, 28 साल से कायम है भाईचारे की ये अनोखी परंपरा

Andhra Pradesh News: आमतौर पर विनायक चतुर्थी आते ही शहरों और गांवों में अलग-अलग गलियों और मोहल्लों में गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं. कहीं भव्य पंडाल सजते हैं तो कहीं बड़ी प्रतिमाओं को लेकर उत्साह और प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है. लेकिन आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले का ओम्मावरम गांव इस मामले में बिल्कुल अलग मिसाल पेश करता है. यहां पिछले 28 वर्षों से पूरे गांव के लिए सिर्फ एक ही गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है और जाति-समुदाय की परवाह किए बिना ग्रामीण एक साथ मिलकर भगवान गणेश की पूजा करते हैं.

नागुलुप्पलापाडु मंडल के ओम्मावरम गांव में करीब तीन दशक पहले शुरू हुई यह परंपरा आज भी उसी उत्साह और एकता के साथ जारी है. गांव के लोगों के लिए गणेश उत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का पर्व बन चुका है. इस वर्ष भी ग्रामीणों ने एक ही गणेश प्रतिमा स्थापित की है. गांव में 11 दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन होते हैं. उत्सव के दौरान पूरा गांव एक साथ दिखाई देता है. हर वर्ग और समुदाय के लोग कार्यक्रमों में शामिल होते हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, अलग-अलग गलियों में अलग मंडप लगाने के बजाय पूरे गांव ने वर्षों पहले एक ही गणपति की पूजा करने की परंपरा शुरू की थी. समय के साथ यह परंपरा गांव की पहचान बन गई.

विदेश और दूसरे शहरों से भी लौटते हैं ग्रामीण

ओम्मावरम की आबादी करीब 3 हजार है. गांव के करीब 80 लोग सॉफ्टवेयर क्षेत्र में काम करते हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग नौकरी और व्यवसाय के सिलसिले में दूसरे शहरों और क्षेत्रों में रहते हैं. बावजूद इसके विनायक चतुर्थी के दौरान गांव लौटना कई परिवारों के लिए खास परंपरा बन चुका है. 11 दिनों तक चलने वाले उत्सव के दौरान परिवार और रिश्तेदार एक साथ जुटते हैं. सबसे खास आकर्षण विसर्जन का दिन होता है, जब बाहर रहने वाले ग्रामीण भी अपने गांव पहुंचकर सामूहिक आयोजन का हिस्सा बनते हैं.

11वें दिन निकलेगी विशाल ट्रैक्टर रैली

गणेश उत्सव के 11वें दिन गांव से भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के लिए विशाल ट्रैक्टर रैली निकाली जाएगी. यह रैली उप्पुगुंडुर होते हुए पेडागंजम तट तक पहुंचेगी, जहां विधि-विधान के साथ गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा. विसर्जन यात्रा में गांव के बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे. इस दौरान धार्मिक उत्साह के साथ ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी भी देखने को मिलेगी.

त्योहार से बढ़कर एकता का उत्सव

ओम्मावरम की 28 साल पुरानी परंपरा यह बताती है कि त्योहार केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने का माध्यम भी बन सकते हैं. जहां अलग-अलग गलियों में अलग-अलग प्रतिमाएं स्थापित करने का चलन है, वहीं इस गांव ने वर्षों से एक ही गणपति के सामने एक साथ खड़े होने की परंपरा कायम रखी है. यही वजह है कि ओम्मावरम में विनायक चतुर्थी केवल पूजा और विसर्जन का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे गांव को एक सूत्र में बांधने वाला उत्सव बन चुका है

इनपुट- तेलुगु डेस्क

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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