खाड़ी युद्ध के बीच भी सोने की कीमतों में ठहराव, मजबूत डॉलर बना बड़ी वजह

पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में अपेक्षित तेजी नहीं देखी जा रही है। आम तौर पर युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के समय निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आती है, लेकिन इस बार बाजार का रुख अलग नजर आ रहा है।

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके पीछे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली तेल आपूर्ति में संभावित बाधा को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

इसके बावजूद सोने की कीमतों में बड़ी तेजी नहीं आई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। वैश्विक संकट के समय कई निवेशक सोने के बजाय डॉलर को सुरक्षित निवेश मानकर उसकी ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत बना हुआ है।

इसके अलावा ऊंची ब्याज दरें भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाए हुए हैं। जब केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें ऊंची रखते हैं, तो निवेशकों के लिए सोने की तुलना में अन्य निवेश विकल्प ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं। इसी कारण सोने की कीमतें फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले दो सप्ताह के दौरान सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। फरवरी के अंत में सोना करीब 5,277 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंच गया था, जबकि मार्च के मध्य तक यह गिरकर लगभग 5,054 डॉलर प्रति औंस तक आ गया। फिलहाल सोना करीब 5,165 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है।

घरेलू बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। फरवरी के अंत में एमसीएक्स पर सोना लगभग 1,69,880 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया था, जो मार्च के मध्य तक घटकर करीब 1,58,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास आ गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतें वैश्विक आर्थिक हालात और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेंगी। अगर पश्चिम एशिया का युद्ध और गंभीर होता है या वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा बढ़ता है तो सोने की कीमतों में फिर से तेजी देखी जा सकती है। वहीं अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहती है और ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

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