वायरल वीडियो की पुष्टि के बाद सख्त एक्शन: जनशिक्षक सहित 5 पर वेतन रोक, बीईओ को कड़ी चेतावनी; मचा हड़कंप

सूरजपुर: शिक्षा या शोषण? यह सवाल एक बार फिर प्रतापपुर विकासखंड से उठ खड़ा हुआ है. वासुदेवपुर दवनकरा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में आदिवासी मासूम बच्चों से झाड़ू लगवाने और शौचालय साफ करवाने का वीडियो सामने आने के बाद पूरे सरगुजा संभाग में हड़कंप मच गया. खबर प्रकाशन के बाद कलेक्टर सूरजपुर एस. जयवर्धन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी अजय मिश्रा को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए.
जिला स्तरीय जांच में मामला सही पाया गया. स्पष्ट हुआ कि बच्चों से नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जा रही थी. इसके बाद डीईओ ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुन्नूलाल धुर्वे को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो दिन में जवाब तलब किया. जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर उन्हें अंतिम चेतावनी दी गई और साप्ताहिक निरीक्षण प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से जिला कार्यालय में जमा करने के निर्देश दिए गए.
कार्रवाई यहीं नहीं रुकी. संकुल केंद्र दवनसरा के जनशिक्षक कामेश्वर सिंह की एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई. बांसदेवपुर स्कूल के प्रधान पाठक राकेश कुमार गुप्ता और सहायक शिक्षक प्रदीप कुमार सिंह की दो-दो वार्षिक वेतन वृद्धि अवरुद्ध कर दी गई. वहीं सरईडांड़ बोंगा स्कूल में शराब के नशे में पाए गए प्रधान पाठक जवाहर लाल और सहायक शिक्षक रोशनलाल उरांव पर भी दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बीईओ की जवाबदेही पर है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूर्व में भी विवादों और निलंबन के बावजूद व्यवस्था में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ. यदि निरीक्षण और निगरानी प्रभावी होती, तो क्या बच्चों से झाड़ू लगवाने जैसी शर्मनाक स्थिति सामने आती? जांच में यह भी सामने आया कि सफाईकर्मी नियुक्ति के नाम पर वर्षों तक बच्चों से सफाई कराई जाती रही, जबकि वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासनिक जिम्मेदारी थी.
आखिर निरीक्षण रिपोर्टों में सब कुछ “सामान्य” कैसे दिखाया जाता रहा? कलेक्टर ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. अब नजर इस बात पर है कि यह कार्रवाई सिर्फ नोटिस और वेतन वृद्धि रोकने तक सीमित रहेगी या जिम्मेदार कुर्सियों तक भी पहुंचेगी. अभिभावक और पूरा क्षेत्र ठोस और उदाहरणात्मक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहा है.











