डायरेक्ट टैक्स संग्रह में मजबूत बढ़ोतरी, सरकारी खजाने में पहुंचे 19.43 लाख करोड़ रुपये

चालू वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार के डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 10 फरवरी तक नेट डायरेक्ट टैक्स संग्रह 9.4 प्रतिशत बढ़कर 19.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है।
इनकम टैक्स विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल से 10 फरवरी के बीच कुल 22.8 लाख करोड़ रुपये का ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन हुआ है। यह बीते वित्त वर्ष की समान अवधि से करीब 4.1 प्रतिशत अधिक है। यह बढ़ोतरी बजट लक्ष्यों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डायरेक्ट टैक्स संग्रह में कॉरपोरेट टैक्स और पर्सनल इनकम टैक्स का प्रमुख योगदान रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के मुनाफे में स्थिरता और वेतनभोगी वर्ग की आय में वृद्धि से टैक्स कलेक्शन को मजबूती मिली है। इसके साथ ही डिजिटल रिटर्न फाइलिंग और सख्त निगरानी व्यवस्था से टैक्स अनुपालन में भी सुधार हुआ है।
इसी अवधि में सरकार ने करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये के टैक्स रिफंड जारी किए हैं। रिफंड के बाद बची राशि को ही नेट टैक्स कलेक्शन माना जाता है। समय पर रिफंड मिलने से करदाताओं का भरोसा बढ़ा है और टैक्स व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी है।
मजबूत टैक्स संग्रह से सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। बढ़ता डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन इस बात का संकेत देता है कि आर्थिक गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं और आय के स्रोत मजबूत हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, मौजूदा वित्त वर्ष में डायरेक्ट टैक्स संग्रह का यह रुझान सरकार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है और बजट लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में इसे अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।











