खालिस्तानी नेटवर्क की नई भर्ती रणनीति, अब साफ छवि वाले युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार खालिस्तानी आतंकी संगठनों ने भर्ती के अपने तौर-तरीकों में बदलाव किया है। पहले आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को नेटवर्क में शामिल करने पर जोर दिया जाता था, लेकिन अब ऐसे स्थानीय लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और जो सामान्य नौकरी या दूसरे काम करते हैं।
जांच में सामने आया है कि विदेश में बैठे नेटवर्क से जुड़े लोग भारत में स्थानीय युवाओं से संपर्क कर उन्हें पैसे का लालच देते हैं। इसके बदले उनसे प्रचार गतिविधियों में शामिल होने और कुछ स्थानों से जानकारी जुटाने जैसे काम कराए जाने का दावा किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और इसके वित्तीय स्रोतों की जांच कर रही हैं।
भर्ती के तरीके में आया बदलाव
अधिकारियों के मुताबिक, पहले आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान कर उन्हें नेटवर्क में शामिल किया जाता था। अब पढ़े-लिखे और सामान्य जीवन जीने वाले लोगों को भी संपर्क किया जा रहा है। जांच में ऐसे कई लोगों का पता चला है जिनका पहले कोई आपराधिक इतिहास नहीं था।
इन लोगों को कथित तौर पर चुने गए स्थानों पर प्रचार गतिविधियां करने और जानकारी एकत्र करने के लिए पैसे की पेशकश की गई। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह सामान्य पृष्ठभूमि वाले लोगों के जरिए नेटवर्क अपनी गतिविधियों को कम संदेह के साथ संचालित करने की कोशिश कर रहा है।
विदेशी फंडिंग और स्थानीय नेटवर्क की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, विदेश में बैठे संचालकों से वित्तीय मदद मिलने और अलग-अलग देशों में मौजूद हैंडलर्स के जरिए भारत में स्थानीय लोगों तक पहुंच बनाने की बात सामने आई है। एजेंसियां फंड के प्रवाह का पता लगाने के साथ यह भी जांच कर रही हैं कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हैं।
जांच का दायरा उत्तर भारत के कई शहरों तक बताया जा रहा है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या अन्य भारतीय शहरों में भी इसी तरह भर्ती और प्रचार गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।











