गैस की कमी में भी नहीं रुकेगा चूल्हा, इन विकल्पों से आसानी से बनाएं खाना

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ने से कई देशों में गैस की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और सप्लाई प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। भारत में भी घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में करीब 60 रुपये और व्यावसायिक सिलेंडर में लगभग 115 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। ऐसी स्थिति में अगर गैस की उपलब्धता कम हो जाए तो खाना बनाने के लिए वैकल्पिक तरीकों की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे समय में इंडक्शन चूल्हा सबसे आसान और आधुनिक विकल्प बन सकता है। यह बिजली से चलता है और गैस की तुलना में तेजी से खाना पकाने में मदद करता है। चाय, दाल, सब्जी और चावल जैसे रोजमर्रा के व्यंजन इंडक्शन कुकटॉप पर आसानी से बनाए जा सकते हैं। हालांकि इसके लिए इंडक्शन बेस वाले बर्तनों की जरूरत होती है।
इलेक्ट्रिक केतली भी गैस की कमी के दौरान काफी उपयोगी साबित हो सकती है। आमतौर पर पानी उबालने के लिए इस्तेमाल होने वाली इस डिवाइस में नूडल्स, सूप, चाय, दलिया और उबले अंडे जैसी चीजें भी बनाई जा सकती हैं। छोटे परिवार या अकेले रहने वाले लोगों के लिए यह एक आसान और सस्ता विकल्प है।
माइक्रोवेव ओवन भी खाना पकाने का एक अच्छा विकल्प बन सकता है। इसमें सब्जियां, दाल, पास्ता और कई अन्य व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। आधुनिक माइक्रोवेव में कई कुकिंग मोड होते हैं, जो अलग-अलग प्रकार के भोजन को आसानी से पकाने में मदद करते हैं।
स्टीमर का इस्तेमाल भी खाना बनाने के लिए किया जा सकता है। इसमें सब्जियां, मोमोज, इडली, ढोकला, खमन और नूडल्स जैसे व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। स्टीमर में खाना कम तेल में बनता है और पोषक तत्व भी काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं।
एयर फ्रायर भी गैस की कमी के समय उपयोगी साबित हो सकता है। इसमें गर्म हवा की मदद से खाना पकाया जाता है, जिससे कम तेल में कुरकुरा और स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जा सकता है। फ्रेंच फ्राइज, समोसा, कटलेट, पकोड़े और कई स्नैक्स इसमें बनाए जा सकते हैं।
जहां बिजली की समस्या होती है, वहां केरोसीन स्टोव भी एक विकल्प बन सकता है। यह मिट्टी के तेल से चलता है और बिजली की जरूरत नहीं होती। हालांकि इसे इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना जरूरी होता है।
ग्रामीण इलाकों में लकड़ी और उपलों से चलने वाले पारंपरिक चूल्हे भी उपयोग में लाए जाते हैं। गैस या बिजली न होने की स्थिति में यह तरीका काम आ सकता है, हालांकि इसमें धुआं ज्यादा निकलता है और खाना पकाने में अधिक समय लगता है।
इसके अलावा सिगड़ी या कोयले वाले चूल्हे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसे आमतौर पर खुले या हवादार स्थान पर इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है क्योंकि इसमें धुआं निकलता है।
ऊर्जा संकट या गैस की कमी की स्थिति में इन आधुनिक और पारंपरिक विकल्पों की मदद से घरों में खाना बनाना जारी रखा जा सकता है। सही जानकारी और तैयारी से ऐसी परिस्थितियों में भी रसोई का काम आसानी से चलाया जा सकता है।










