आज का पंचांग 13 अप्रैल : आज वरुथिनी एकादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा

अंग्रेजी तारीख 13 अप्रैल 2026 ई.। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। राहुकाल सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक। एकादशी तिथि रात्रि 01 बजकर 08 मिनट (14 अप्रैल) तक उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ। धनिष्ठा नक्षत्र सायं 04 बजकर 03 मिनट तक उपरांत शतभिषा नक्षत्र का आरंभ। शुभ योग सायं 05 बजकर 17 मिनट तक उपरांत शुक्ल योग का आरंभ। बव करण दोपहर 01 बजकर 18 मिनट तक उपरांत बालव करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात कुंभ राशि पर संचार करेगा।

महत्वपूर्ण विवरण
तिथि: कृष्ण एकादशी
रात्रि 01:08 बजे (14 अप्रैल) तक, फिर द्वादशी
योग: शुभ सायं 05:17 बजे तक, फिर शुक्ल
करण: बव दोपहर 01:18 बजे तक
करण: बालव रात्रि 01:08 बजे (14 अप्रैल) तक

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय का समय
प्रातः 05:58 बजे
सूर्यास्त का समय सायं 06:46 बजे
चंद्रोदय का समय रात्रि 03:53 बजे (14 अप्रैल)
चंद्रास्त का समय दोपहर 02:33 बजे
आज के व्रत त्योहार वरुथिनी एकादशी

आज का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल 2026 :
अभिजीत मुहूर्त
दोपहर 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
अमृत काल आज उपलब्ध नहीं है
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 30 मिनट से 5 बजकर 14 मिनट तक
आज का अशुभ मुहूर्त 13 अप्रैल 2026 :सुबह 07:30 से 09:00 बजे तक राहुकाल रहेगा। दोपहर 01:30 से 03:00 बजे तक गुलिक काल रहेगा। सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक यमगंड रहेगा।

आज का नक्षत्र
आज चंद्रदेव धनिष्ठा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
धनिष्ठा नक्षत्र: सायं 04:03 बजे तक
नक्षत्र स्वामी: मंगलदेव
राशि स्वामी: शनिदेव
देवता: अष्ट वसु (भौतिक सुख-समृद्धि के देवता)
प्रतीक: ढोलक या बांसुरी

सामान्य विशेषताएं: मजबूत इच्छाशक्ति, आत्मविश्वासी, साहसी, धैर्यवान, मेहनती, प्रसिद्ध, धनवान और संगीत के शौकीन।

वरुथिनी एकादशी 2026
एकादशी तिथि प्रारंभ
13 अप्रैल, सुबह 01:16 बजे
एकादशी तिथि समाप्त 14 अप्रैल, सुबह 01:08 बजे
व्रत पारण समय 14 अप्रैल, सुबह 06:54 से 08:31 बजे तक

सनातन धर्म में वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे ‘वरुथिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। इस पावन तिथि पर श्रीहरि के ‘वराह’ स्वरूप की उपासना करने का विधान है, जिससे जातक के संचित पापों का क्षय होता है। देखा जाए तो यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सुख-सौभाग्य में वृद्धि करने वाला एक आध्यात्मिक कवच है।पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, इस एकादशी का उपवास रखने से मिलने वाला पुण्य किसी कन्यादान या कठिन तपस्या के फल के बराबर होता है। श्रद्धालु पूरे दिन भक्ति भाव से व्रत रखते हैं और अगले दिन शुभ मुहूर्त में पारण कर अपना व्रत पूर्ण करते हैं। निष्काम भाव से की गई यह पूजा जातक के लिए मोक्ष के द्वार खोलती है और जीवन में मानसिक स्पष्टता लाती है।

आज का उपाय : आज भगवान विष्णु को पीले फल और तुलसी दल अर्पित करें। सोमवार के दिन एकादशी का व्रत रखना और दीपदान करना जीवन के सही संचालन में अत्यंत फलदायी होता है।

jagjaahir desk

जगजाहिर में स्पोर्ट्स बीट पर काम कर रहे हैं। स्पोर्ट्स में क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, टेनिस, बैडमिंटन और एथलेटिक्स गेम्स के मामलों पर काफी अच्छी पकड़ रखते हैं। हमारे पास विभिन्न मुद्दों पर लिखने का 8 साल से अधिक समय का अनुभव है। पत्रकारिता के अपने इस करियर में कई बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स जिसमें साल 2015 और 2019 और 2023 वनडे वर्ल्ड कप, आईपीएल और फुटबॉल वर्ल्ड कप को कवर किया है।
close
Virus-free.www.avast.com