खबर का बम फूटा तो हिली सत्ता! कस्तूरबा आश्रम पहुंची विधायक, बच्चियों का दर्द सुनते ही बीईओ-बीआरसी पर गिरी गाज

सूरजपुर: कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय प्रतापपुर में अनियमितता, भ्रष्टाचार, घटिया भोजन और आदिवासी बालिकाओं के साथ कथित प्रताड़ना को लेकर वयम भारत पोर्टल पर प्रकाशित खबर के बाद आखिरकार सत्ता और प्रशासन की नींद टूटी. खबर सामने आते ही प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते स्वयं 4 फरवरी को कस्तूरबा आश्रम पहुंचीं और छात्राओं से सीधे संवाद कर बदहाल व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण किया.

विधायक ने आश्रम पहुंचते ही छात्राओं से अलग-अलग चर्चा की. बातचीत के दौरान बच्चियों का दर्द छलक पड़ा. छात्राओं ने बताया कि उन्हें आधा पेट भोजन, घटिया गुणवत्ता का खाना, मानसिक दबाव, डांट-फटकार और टॉर्चर का सामना करना पड़ता है. मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है और शिकायत करने पर डराया जाता है. कई बच्चियां अपनी पीड़ा बताते-बताते रो पड़ीं.

बच्चियों की पीड़ा सुनकर भड़की विधायक, अफसरों की लगाई क्लास

छात्राओं की बातें सुनते ही विधायक का गुस्सा फूट पड़ा. मौके पर मौजूद विकासखंड शिक्षा अधिकारी मुन्नूलाल धुर्वे को विधायक ने जमकर फटकार लगाई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. वहीं बीआरसी रमेश शरण सिंह को फोन पर कड़ी फटकार लगाते हुए छात्रावासों में व्याप्त अव्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार ठहराया और तत्काल सुधार के निर्देश दिए.

कलेक्टर से सीधा संपर्क, जांच के आदेश

विधायक ने मोबाइल के माध्यम से कलेक्टर से सीधे संपर्क कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की. उन्होंने साफ कहा कि यह मामला केवल एक अधीक्षिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूरे सिस्टम की भूमिका संदिग्ध है.

विधायक का नंबर नहीं लिखा, नाराज हुईं विधायक

आश्रम में विधायक का संपर्क नंबर प्रदर्शित नहीं होने पर भी विधायक ने नाराजगी जताई। उन्होंने आश्रम अधीक्षक और बीईओ को निर्देश दिया कि सभी कस्तूरबा आश्रमों और छात्रावासों में तत्काल विधायक का मोबाइल नंबर लिखा जाए, ताकि बच्चियां किसी भी परेशानी में सीधे संपर्क कर सकें.

“मैं मां हूं, तुम्हारी चिंता मेरी जिम्मेदारी”

विधायक ने छात्राओं को भरोसा दिलाते हुए कहा,
“मैं एक मां हूं, तुम लोगों की हर परेशानी मेरी परेशानी है. आज के बाद अगर किसी भी तरह की दिक्कत हो तो सीधे मुझे फोन करना.”
उन्होंने छात्राओं से मन लगाकर पढ़ाई करने और भविष्य पर ध्यान देने की समझाइश दी और कहा कि बाकी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी उनकी है.

एक सप्ताह में बीईओ–बीआरसी हटाने के निर्देश

विधायक ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो बीईओ और बीआरसी को हटाने सहित और सख्त कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि आदिवासी बच्चियों के साथ अन्याय करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा.

वयम भारत की खबर से प्रशासन बैकफुट

गौरतलब है कि इससे पहले कस्तूरबा आश्रम में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जनप्रतिनिधियों को बालिकाओं से मिलने से रोका गया था, जिसके बाद सियासी संग्राम छिड़ गया। रोती बच्चियों ने सड़क पर उतरकर अपना दर्द बयां किया था। अब वयम भारत पोर्टल की खबर के बाद पूरा प्रशासन बैकफुट पर नजर आ रहा है.

कस्तूरबा आश्रम प्रकरण अब सिर्फ एक छात्रावास का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है. अब देखना होगा कि जांच और कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या वास्तव में दोषियों पर गाज गिरती है.

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