1.24 करोड़ का नकली घी घोटाला! 2 साल बाद शिकंजा:, सेहत से खिलवाड़ पर एक्शन

गुजरात के मेहसाणा जिले के कडी तालुका स्थित बुदासन गांव में दो साल पहले उजागर हुए बहुचर्चित नकली घी घोटाले में पुलिस ने आखिरकार आधिकारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने 12 अक्टूबर 2024 को बुदासन के बाहरी इलाके में स्थित एक संदिग्ध फैक्ट्री पर अचानक छापा मारा था। इस कार्रवाई के दौरान मौके से वेजिटेबल ऑयल, हानिकारक केमिकल, एसेंस और पैकेजिंग मशीनरी बरामद की गई थी, जिसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नकली देसी घी बनाने के लिए किया जा रहा था। इस छापेमारी में पुलिस ने करीब 1.24 करोड़ रुपये का नकली घी ज़ब्त कर पूरी फैक्ट्री को सील कर दिया था।

लैब रिपोर्ट में देरी बनी वजह

छापेमारी के लगभग दो साल बाद मामला दर्ज होने का मुख्य कारण फोरेंसिक और लैब जांच की लंबी प्रक्रिया रही। पुलिस ने ज़ब्त किए गए घी के सैंपल एनालिसिस के लिए एफएसएल (FSL) और फूड एनालिसिस लैबोरेटरी भेजे थे। हाल ही में आई आधिकारिक रिपोर्ट में यह साफ तौर पर साबित हुआ कि ज़ब्त घी पूरी तरह से घटिया, मिलावटी और मानव सेवन के लिए अत्यंत हानिकारक था।

अहमदाबाद के व्यापारी पर कानूनी शिकंजा

लैब रिपोर्ट की पुष्टि के आधार पर कडी पुलिस ने 12 अगस्त 2026 को अहमदाबाद के व्यापारी जनक भावसार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपी पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने, मिलावटखोरी और आपराधिक नीयत से नकली सामान बेचने के संगीन आरोप लगाए गए हैं।

कडी पुलिस स्टेशन के जांच अधिकारियों ने आरोपी व्यापारी को हिरासत में लेने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके साथ ही, पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि इस बड़े रैकेट में कौन-कौन से स्थानीय या बाहरी सप्लायर और वितरक शामिल थे।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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