हाथरस में मनाई गई नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 127वीं जयंती, लगे जय हिंद के नारे

हाथरस : जनपद हाथरस में आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 127वीं जयंती बड़े ही श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई. कार्यक्रम का शुभारंभ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के छवि चित्र पर अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर तथा सभी उपस्थित जनों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इसके पश्चात “जय हिंद” के नारों के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा.

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने नेताजी के जीवन, संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके अद्वितीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला.वक्ताओं ने बताया कि हिंदुस्तान के महान सपूत एवं स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता सुभाष चंद्र बोस का जन्म उड़ीसा के कटक नगर में एक बंगाली परिवार में हुआ था.उनके पिता जानकी नाथ बोस एक प्रसिद्ध वकील एवं राय बहादुर थे, जबकि उनकी माता प्रभावती देवी धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं.
नेताजी का दुर्लभ चित्र” जब वह निर्विरोध 1938 में गुजरात के हरिपुर में “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” के चुनाव में अध्यक्ष चुने गए थे.
डॉ. देवेंद्र कुमार शर्मा, पूर्व प्रधानाचार्य, ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नेताजी ने कटक से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, इसके बाद कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में अध्ययन किया. वर्ष 1920 में उन्होंने इंग्लैंड में प्रतिष्ठित भारतीय सिविल सेवा (आईसीएस) की परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन अंग्रेजों की गुलामी स्वीकार न करते हुए वर्ष 1921 में पद से इस्तीफा दे दिया और देश की आजादी के लिए स्वयं को समर्पित कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सक्रिय हो गए.
पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी भंवर सिंह पोरस ने बताया कि वर्ष 1938 में गुजरात के हरिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस निर्विरोध कांग्रेस अध्यक्ष चुने गए. वर्ष 1939 में उन्होंने गांधी जी एवं कांग्रेस कार्यसमिति समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को पराजित कर पुनः अध्यक्ष पद प्राप्त किया, लेकिन विचारधारात्मक मतभेदों के कारण उन्होंने बाद में इस्तीफा दे दिया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष बनाया गया.
डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा “फौजी” ने भावुक होते हुए कहा कि वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उनके पिताजी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा “फौजी” की उपाधि से सम्मानित किया गया था.उन्होंने बताया कि वे उस समय बहुत छोटे थे, इसलिए अपने पिताजी को देख नहीं पाए, लेकिन उनका पालन-पोषण ब्रिटिश काल के प्रधानाचार्य पंडित किशोरी लाल मिश्र द्वारा किया गया.आज भी उनका पूरा परिवार स्वयं को “फौजी” कहलाने में गर्व महसूस करता है
कार्यक्रम में ऐतिहासिक घटनाओं पर भी प्रकाश डाला गया.वक्ताओं ने बताया कि 30 दिसंबर 1943 को नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने अंडमान-निकोबार में आजाद हिंदुस्तान का झंडा फहराकर भारत की आजादी की घोषणा की थी और “जन गण मन अधिनायक जय है” को आजाद हिंद फौज का राष्ट्रीय गान घोषित किया था.इसका उल्लेख 24 जनवरी 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लाल किले से अपने भाषण में किया था। बाद में भारत सरकार द्वारा 24 जनवरी 1950 को “जन गण मन” को भारत का राष्ट्रीय गान घोषित किया गया.
वक्ताओं ने बताया कि नेताजी को ब्रिटिश सरकार ने नजरबंद कर रखा था, लेकिन 17 जनवरी 1943 को वे अंग्रेजी हुकूमत को चकमा देकर जापान रवाना हो गए. 21 अक्टूबर 1943 को आजाद हिंदुस्तान की अस्थायी सरकार की स्थापना की गई, जिसे 23 अक्टूबर को सात देशों द्वारा मान्यता भी प्रदान की गई. आजाद हिंदुस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री सुभाष चंद्र बोस बने, वित्त मंत्री लेफ्टिनेंट ए.सी. चटर्जी, प्रचार मंत्री ए.एस. अय्यर, महिला मामलों की मंत्री लक्ष्मी स्वामीनाथन (बाद में लक्ष्मी सहगल) तथा प्रमुख सलाहकार रासबिहारी बोस रहे.
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से “जन गण मन अधिनायक जय है” का गान किया और नेताजी को नमन करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया.











