रेगिस्तान में 14 जलकुंड, पीपल के पेड़ों की वाटिका… हरियाली के लिए 26 राज्यों की यात्रा की; कौन हैं ग्रीनमैन नरपतसिंह?

पश्चिमी राजस्थान का विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र अपनी भीषण गर्मी, कम वर्षा और लगातार बढ़ते जल संकट के लिए जाना जाता है. यहां गर्मियों के मौसम में पानी की एक-एक बूंद का महत्व बढ़ जाता है. जहां इंसानों के लिए पेयजल की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता है, वहीं पशु-पक्षियों और वन्यजीवों के लिए पानी उपलब्ध कराना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है. ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में बाड़मेर जिले के लंगेरा गांव निवासी पर्यावरणविद् और ग्रीनमैन के नाम से प्रसिद्ध नरपतसिंह राजपुरोहित बीते 15 वर्षों से पर्यावरण, जल और वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं. उनके प्रयासों ने रेगिस्तान में जल संरक्षण और हरियाली की नई मिसाल कायम की है.
नरपतसिंह राजपुरोहित ने अब तक पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और जोधपुर जिलों के विभिन्न वन्यजीव क्षेत्रों और ओरण भूमि में 14 जलकुंडों का निर्माण करवाया है. इन जलकुंडों के माध्यम से भीषण गर्मी में हजारों पशु-पक्षियों और वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. इन प्रयासों से उन बेजुबान जीवों को राहत मिली है, जो पानी की तलाश में रेगिस्तान में भटकते रहते हैं.
पर्यावरण संरक्षण को अपना जीवन समर्पित किया
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनका समर्पण इतना गहरा है कि उन्होंने अपना सफल व्यवसाय भी छोड़ दिया. नरपतसिंह पहले टोंक जिले में मिठाई की दुकान संचालित करते थे. करीब 15 वर्ष पहले उन्होंने अपनी दुकान लगभग 30 लाख रुपये में बेच दी और पूरी तरह पर्यावरण संरक्षण को अपना जीवन समर्पित कर दिया. तब से वे पौधारोपण, जल संरक्षण, वन्यजीव बचाव और सामाजिक जागरूकता के कार्यों में जुटे हुए हैं.
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका योगदान सराहनीय है. उन्होंने अब तक 400 से अधिक घायल हिरणों, कई मोरों, खरगोशों, लोमड़ियों, बाज, उल्लुओं, गोल्डन सियार और तिलोर जैसे दुर्लभ जीवों का रेस्क्यू कर उनकी जान बचाई है. साथ ही वन्यजीवों का शिकार करने वाले शिकारियों को पकड़वाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
इसके अलावा वे अरावली पर्वतमाला संरक्षण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त भारत, जैव विविधता संरक्षण और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर देशभर में जनजागरण अभियान चला रहे हैं. विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से वे हजारों लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक कर रहे हैं. उनके अथक प्रयास आज रेगिस्तान में जीवन, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की नई उम्मीद बनकर उभर रहे हैं.











