दिल्ली में 33 लाख SIR के नोटिस, 15200 अधिकारी इसे सुलझाएंगे: क्या है चुनाव आयोग का पूरा प्लान?

दिल्ली SIR विवाद में बुरी तरह घिरे चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है. मंगलवार (22 सितंबर) को सुनवाई के आयोग ने कहा कि एक भी नोटिस गलत जारी नहीं हुआ है. हम एक एक मामले को देख रहे हैं. किसी का भी नाम कटने नहीं दिया जाएगा. हमने दिल्ली में एसआईआर मसले को सुलझाने के लिए 1200 इलेक्टर्स रिप्रजेंटेशन ऑफिसर्स (एसडीएम लेवल) उतारे हैं.
चुनाव आयोग के मुताबिक नोटिस को सेटल करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में 14 हजार बीएलओ की तैनाती की गई है. आयोग ने कहा कि अभी 31 अक्टूबर तक की डेडलाइन है. जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया जाएगा.
33 लाख लोगों को नोटिस कैसे गया?
सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज की तरफ से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ऐसे लोगों को अंग्रेजी में नोटिस भेजा गया है, जिन्हें अंग्रेजी नहीं पढ़नी आती है. कई पूर्व जज और वरिष्ठ वकीलों को नोटिस भेजा गया है. रिटायर अधिकारी भी इसकी जद में हैं. यह सब मशीन से भेजा गया है.
भूषण ने आगे कहा कि ऐसे लोग कहां से दस्तावेज लाएंगे, जिनकी माता-पिता की उम्र उनसे सिर्फ 15 साल ज्यादा है? इसमें उनकी क्या गलती है और इसका दस्तावेज कहां से आएगा? ये सिर्फ 12 दस्तावेज मानते हैं. इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि 12 से ज्यादा दस्तावेज मान्य होंगे.
भूषण के मुताबिक तार्किक विसंगतियों के नाम पर 19 लाख से ज्यादा लोगों को नोटिस भेजा गया है. इनमें कई ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोई कारण नहीं बताया गया है. बड़े लोग तो अपना मामला ठीक कर लेंगे, लेकिन गरीब कहां जाएगा?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जॉयमाल बागची ने चुनाव आयोग से कहा कि हर वार्ड में बीएलओ को बैठाइए. यह तय कीजिए कि लोगों का काम आसानी से हो जाए.
दिल्ली SIR पर बवाल क्यों मचा है?
2025 के विधानसभा चुनाव में दिल्ली में कुल 1.5 करोड़ वोटर्स थे. अब चुनाव आयोग ने 47 लाख के नाम एसआईआर ड्राफ्ट लिस्ट से हटा दिए. 33 लाख लोगों को नोटिस भेजा गया है. प्रशांत भूषण का कहना है कि 13 लाख ऐसे लोग हैं, जिनके नाम 2002 की सूची से मेल नहीं खा रहे हैं.
भूषण के मुताबिक 19 लाख लोगों को नोटिस तार्किक विसंगतियों के नाम पर भेजा गया है. सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि नोटिस कम्प्यूटर से भेजे गए हैं. इसे ठीक किया जा सकता है.
चुनाव आयोग ने लाल कृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस जयशंकर, कपिल सिब्बल जैसे हाई प्रोफाइल लोगों को भी नोटिस भेजा है.
नोटिस कैसे और क्यों भेजा जाता है?
चुनाव आयोग के नियम के मुताबिक एसआईआर में किसी भी तरह की गड़बड़ी के मामले में इलेक्ट्रॉनिक रिप्रेजेंटेशन ऑफिसर्स को नोटिस भेजने का अधिकार दिया गया है. ईआरओ बीएलओ के जरिए यह नोटिस भिजवाता है.
चुनाव आयोग ने अपने वेबसाइट पर भी नोटिस डाल दिया है. इसे आसानी से एक्सेस किया जा सकता है. नोटिस मिलने के बाद नाम को वैरिफाई कराने के लिए डॉक्यूमेंट्स को बीएलओ के पास जमा कराने होते हैं.
बीएलओ इसके बाद डॉक्यूमेंट्स को वैरिफाई करता है. नाम कटने के बाद संबंधित शख्स को ट्रिब्यूनल के सामने पेश होना होता है. ट्रिब्यूनल से अगर पक्ष में फैसला नहीं होता है तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाने की व्यवस्था है.











