फतेहपुर: रात भर खेत की रखवाली, सुबह नहीं खुलीं आंखें… ठंड ने बुझा दिया किसान के घर का चिराग

फतेहपुर: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जनपद के आसोथर कड़ाके की ठंड ने एक बार फिर किसान की मजबूरी और मेहनत की कीमत जान लेकर वसूल ली.असोथर थाना क्षेत्र के रिठवा गांव में पूरी रात खेत में फसल की रखवाली करने वाले किसान की ठंड लगने से मौत हो गई. सुबह जब वह नहीं जागे तो घर में कोहराम मच गया. परिवार के लिए वह सिर्फ किसान नहीं, बल्कि जीवन की आखिरी उम्मीद थे.
रिठवा गांव निवासी 60 वर्षीय हरिश्चंद्र पुत्र स्वर्गीय छक्कू पासवान शनिवार रात भोजन के बाद गेहूं के खेत में पानी लगाने और रखवाली के लिए निकले थे. भीषण ठंड के बावजूद फसल की चिंता उन्हें रात भर खेत में डटे रहने को मजबूर करती रही। भोर के समय वह घर लौटे और थकान के कारण सो गए, लेकिन यह नींद उनकी आखिरी नींद साबित हुई.
सुबह देर तक न उठने पर पत्नी कुसमा देवी ने जगाने की कोशिश की तो उनका शरीर ठंडा और निष्प्राण पड़ा था। यह दृश्य देखते ही पत्नी बदहवास होकर गिर पड़ी. बहू विमला देवी और नाती आजाद व गोलू की सिसकियों से पूरा घर गूंज उठा। गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया और लोग शोक-संतप्त परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचने लगे.
हरिश्चंद्र के पास मात्र डेढ़ बीघा जमीन थी. परिवार का पालन-पोषण करने के लिए वह दिन में ठेली लगाकर मेहनत-मजदूरी करता और रात में खेत की रखवाली करता था. उनका पुत्र सर्वेश रोजगार के सिलसिले में दुबई में रहता है, जबकि बेटी सुधा देवी की शादी गाजीपुर जनपद में हुई है. घर पर वृद्ध पत्नी, बहू और मासूम नाती ही रह गए हैं.
सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. थाना प्रभारी धीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी. इधर, परिजनों ने शासन और राजस्व विभाग से किसान मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसानों के लिए ठंड से बचाव और रात्रि सुरक्षा की समुचित व्यवस्था होती, तो शायद आज एक गरीब परिवार का सहारा यूं असमय न टूटता. यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि आखिर कब तक किसान अपनी फसल की रखवाली करते हुए अपनी जान गंवाते.











