सिद्धार्थनगर में 4 करोड़ की ठगी का खुलासा! गल्ला व्यापार की आड़ में किसानों को लूटा

सिद्धार्थनगर :  जिले के इटवा और आसपास के इलाकों में गल्ला व्यापार की आड़ में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है. पिछले एक साल से सक्रिय एक गिरोह ने क्षेत्र के सैकड़ों भोले-भाले किसानों को अपना शिकार बनाते हुए लगभग 4 करोड़ रुपये की ठगी की है. पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है.

​विश्वास जीतकर लगाई चपत
​जांच में यह बात सामने आई है कि ठगी का यह खेल बेहद पेशेवर तरीके से खेला जा रहा था. गिरोह के सदस्यों ने खुद को प्रतिष्ठित व्यापारी के रूप में स्थापित किया. शुरुआत में किसानों से छोटी मात्रा में अनाज खरीदकर तुरंत भुगतान किया गया ताकि उनका भरोसा जीता जा सके. जब किसानों का विश्वास जम गया, तो गिरोह ने उनसे भारी मात्रा में धान और गेहूं उधार पर उठा लिया और भुगतान के समय रफूचक्कर हो गए.

​पारिवारिक सिंडिकेट का खुलासा
​पुलिस की गहन पड़ताल में चौंकाने वाला तथ्य यह मिला कि यह कोई आम गिरोह नहीं, बल्कि एक पारिवारिक सिंडिकेट था. इसमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल थे. ठगी के इस नेटवर्क का जाल सिद्धार्थनगर के इटवा से लेकर पड़ोसी जिले बलरामपुर तक फैला हुआ था. आरोपियों ने बचने के लिए लेन-देन के रिकॉर्ड्स में हेरफेर किया था और दबाव बढ़ने पर पहचान बदलने की भी तैयारी कर रखी थी.

​किसानों पर टूटा दुखों का पहाड़
​इस ठगी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है. प्रभावित किसानों के हालात निम्नलिखित हैं:
​कर्ज का बोझ: बीज और खाद के पैसे चुकाने के लिए किसान अब साहूकारों के कर्ज तले दब गए हैं.
​पारिवारिक संकट: कई परिवारों में बच्चों की शिक्षा रुक गई है और दैनिक गुजारा करना मुश्किल हो गया है.
​सामाजिक प्रभाव: मेहनत की कमाई डूबने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक असर पड़ा है.

​पुलिस की बड़ी कार्रवाई: लगा गैंगस्टर एक्ट
​मामले की गंभीरता को देखते हुए इटवा थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं. जिलाधिकारी से अनुमति मिलने के बाद तीनों मुख्य आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. पुलिस के अनुसार, गिरोह ने करीब 100 से अधिक किसानों को अपना शिकार बनाया था. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं.

​सावधानी की अपील: स्थानीय प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यापारी को उधार पर फसल देने से पहले उसकी विश्वसनीयता और दस्तावेजों की जांच जरूर करें

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