s kirthana fluent hindi -तमिलनाडु में विजय का शंखनाद: जोसेफ विजय बने मुख्यमंत्री, 29 साल की युवा मंत्री सेल्वी कीर्तना ने अपने अंदाज से चौंकाया
Tamil Nadu Cabinet: विजय के कैबिनेट में कीर्तना के अलावा मंत्री बनने वालों में 'बुसी' एन आनंद, आधव अर्जुना, केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, सीटीआर निर्मलकुमार, ए राजमोहन और टी. के. प्रभु हैं।

s kirthana fluent hindi/तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में 10 मई, 2026 की तारीख एक नए युग की शुरुआत के रूप में दर्ज हो गई है। राज्य की सत्ता की बागडोर अब ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के मुखिया जोसेफ विजय के हाथों में है। हालांकि, सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट 4 मई की शाम से ही शुरू हो गई थी
लेकिन रविवार को विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही इस पर आधिकारिक मुहर लग गई। विजय के साथ उनके मंत्रिमंडल के 9 अन्य सहयोगियों ने भी शपथ ली, लेकिन इस पूरे समारोह में सबसे अधिक चर्चा 29 वर्षीय सेल्वी एस. कीर्तना की रही।
कीर्तना न केवल विजय कैबिनेट की एकमात्र महिला मंत्री हैं, बल्कि वह इस मंत्रिमंडल का सबसे युवा चेहरा भी हैं। शपथ लेने के बाद अपने पहले ही बयान में कीर्तना ने इरादे स्पष्ट कर दिए।
उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि तमिलनाडु में अब बदलाव की लहर नहीं, बल्कि बदलाव आ चुका है। एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर कैबिनेट मंत्री बनने तक के अपने सफर पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि जोसेफ विजय केवल प्रतिभा और क्षमता को तवज्जो देते हैं। कीर्तना ने यह भी दावा किया कि उनकी सरकार अगले 35 से 50 वर्षों तक राज्य की सेवा करेगी और इतिहास में सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बनेगी।
सिवाकासी विधानसभा सीट से चुनाव जीतने वाली कीर्तना ने कांग्रेस के दिग्गज उम्मीदवार अशोकन जी को 11,670 वोटों के अंतर से शिकस्त दी। चुनाव में कीर्तना को 68,709 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 57,039 वोटों से संतोष करना पड़ा। दिलचस्प बात यह रही कि अन्नाद्रमुक (AIADMK) के दिग्गज और पूर्व मंत्री राजेंद्र बालाजी 51,078 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गए।
कीर्तना की पहचान केवल एक नेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक प्रखर वक्ता और कुशल रणनीतिकार के रूप में भी है। चुनाव प्रचार के दौरान उनके हिंदी बोलने को लेकर कुछ विवाद भी हुआ, जिसका उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी पार्टी TVK की विचारधारा और अपने नेता के संदेश को पूरे भारत और विदेशों तक पहुंचाना चाहती हैं, इसलिए वह हिंदी का उपयोग कर रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति से डरने के बजाय युवाओं को इसमें आगे आना चाहिए।
शिक्षा और करियर की बात करें तो कीर्तना की कहानी प्रेरणादायक है। तमिल माध्यम के सरकारी स्कूल से पढ़ीं कीर्तना तमिल, तेलुगु, अंग्रेजी और हिंदी भाषाओं पर समान पकड़ रखती हैं। राजनीति में कदम रखने से पहले वह एक सफल पॉलिटिकल कंसल्टेंट (राजनैतिक रणनीतिकार) रह चुकी हैं। उन्होंने न केवल द्रविड़ राजनीति के दो बड़े स्तंभों—DMK और AIADMK—के लिए काम किया, बल्कि आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के चुनावी अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कीर्तना का मानना है कि उनकी भाषाई क्षमता ने उन्हें विभिन्न राज्यों में काम करने और ब्यूरोक्रेसी को समझने के अवसर दिए, जिसका लाभ वह अब तमिलनाडु के विकास में लेना चाहती हैं।











