महाराष्ट्र की यूसीसी कमेटी में विवाद, एक सदस्य का इस्तीफा…जानिए इसमें कितने मेंबर और क्या करते हैं काम

महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के लिए बनाई गई कमेटी को गठन के दो महीने के अंदर ही बड़ा झटका लगा है. बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने कमेटी से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने 19 सितंबर को समिति की ऑनलाइन बैठक के कुछ घंटों बाद ही अपना इस्तीफा भेज दिया था, जिसे राज्य सरकार ने सोमवार को स्वीकार कर लिया. आरसी चव्हाण के पद छोड़ने के बाद इस कमेटी की खूब चर्चा हो रही है. आइए समझते हैं कि इस कमेटी में कितने मेंबर हैं और इसका असल काम क्या है.

कब बनी कमेटी और कितने सदस्य?

महाराष्ट्र सरकार ने इसी साल जून में विधानसभा में कमेटी बनाने की जानकारी दी थी, जिसके बाद जुलाई 2026 में ऑफिशियल तौर पर सात सदस्यीय कमेटी का ऐलान किया गया. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं. वह इससे पहले उत्तराखंड में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी की भी अध्यक्ष रह चुकी हैं.

कमेटी में जस्टिस चव्हाण के अलावा बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एसजी मेहरे, महाराष्ट्र के पूर्व चीफ सेक्रेटरी डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, संविधान विशेषज्ञ रमेश पतंगे और शिक्षाविद् व सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णा रावल शामिल हैं. चव्हाण के इस्तीफे के बाद अब कमेटी में 6 सदस्य बचे हैं.

कमेटी का काम और आगे की योजना

कमेटी को अपनी सिफारिशें देने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है. इसका मुख्य काम शादी, तलाक, विरासत और परिवार से जुड़े सिविल मामलों में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए एक जैसी कानूनी व्यवस्था को लेकर लोगों से सुझाव और राय लेना है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सितंबर में कहा था कि कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार UCC से जुड़े बिल को विधानसभा के नागपुर वाले विंटर सेशन में पेश करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है.

उत्तराखंड के बाद गुजरात और असम भी 2026 में अपने-अपने UCC कानून पास कर चुके हैं और महाराष्ट्र भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. लोगों से राय लेने की यही प्रक्रिया, जिसके लिए कमेटी को 6 महीने का समय दिया गया है, अब विवाद की वजह बन गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी काम को लेकर तैयार हो रही प्रश्नावली और उससे जुड़ी मीटिंग ने जस्टिस चव्हाण को इस्तीफा देने तक पहुंचा दिया.

इस्तीफे की वजह क्या बनी

19 सितंबर की मीटिंग में प्रश्नावली को फाइनल करने पर चर्चा हुई. इसमें कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि सवालों के जवाब सिर्फ ‘हां’ या ‘नहीं’ में लिए जाएं, ताकि आंकड़ों का एनालिसिस आसान हो सके.

जस्टिस चव्हाण का मानना था कि कमेटी का मकसद सिर्फ हां-नहीं में जवाब जुटाना नहीं, बल्कि लोगों के विचारों को गहराई से समझना और व्यापक सहमति बनाना होना चाहिए. यही अंतर उनके इस्तीफे की बड़ी वजह बना.

इसके अलावा उन्होंने मीटिंग में एक ऐसे व्यक्ति की मौजूदगी पर भी आपत्ति जताई, जो कमेटी का सदस्य नहीं था और जिसने UCC वेबसाइट में बदलाव की जरूरत बताई. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऑफिशियल मीटिंग में उस व्यक्ति की भूमिका क्या थी. इस्तीफे में उन्होंने कहा कि वह इसलिए पद छोड़ रहे हैं, ताकि सरकार उनकी जगह किसी और सदस्य को शामिल कर सके.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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