हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बरी होने के बाद भी नहीं मिलेगा पूरा बकाया वेतन

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में बरी होने मात्र से बर्खास्तगी अवधि का पूरा बकाया वेतन पाने का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में “काम नहीं तो वेतन नहीं” का सिद्धांत लागू होगा। यह फैसला विद्युत मंडल के एक पूर्व कर्मचारी की अपील खारिज करते हुए सुनाया गया।

दोषसिद्धि के बाद हुई थी बर्खास्तगी

मामले में कर्मचारी को सहायक श्रेणी-1 सिविल पद पर नियुक्त किया गया था और बाद में उसे पर्यवेक्षक सिविल पद पर पदोन्नत किया गया। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज मामले में विशेष अदालत ने उसे दोषी ठहराया था। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी ने उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया।

कर्मचारी ने दोषसिद्धि के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। इस दौरान वह सेवानिवृत्ति की आयु भी पूरी कर चुका था। बाद में हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान उसे आरोपों से बरी कर दिया। इसके बाद विभाग ने बर्खास्तगी आदेश वापस ले लिया, लेकिन बर्खास्तगी से सेवानिवृत्ति तक की अवधि का वेतन और अन्य आर्थिक लाभ देने से इनकार कर दिया।

डबल बेंच ने अपील खारिज की

कर्मचारी ने विभाग के फैसले को चुनौती दी, लेकिन सिंगल बेंच ने याचिका खारिज कर दी। इसके बाद डबल बेंच में अपील दायर कर कहा गया कि बरी होने के बाद उसे उस अवधि का वेतन और भत्ते मिलना चाहिए, जब वह सेवा से बाहर रहा।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बरी होने के बाद भी कर्मचारी स्वतः बकाया वेतन का दावा अधिकार के रूप में नहीं कर सकता।

“काम नहीं तो वेतन नहीं” सिद्धांत लागू

खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी को आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के आधार पर सेवा से हटाया गया हो, तो बाद में अपील में बरी होने की स्थिति में भी उसे बर्खास्तगी अवधि का पूरा वेतन देना अनिवार्य नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी ने उस अवधि में वास्तविक रूप से कार्य नहीं किया था, इसलिए “काम नहीं तो वेतन नहीं” का सिद्धांत लागू होगा। इसी आधार पर अदालत ने कर्मचारी की अपील को खारिज कर दिया।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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