पाकिस्तान में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच सीधा टकराव, जरदारी के साइन बिना ही हो रही जजों की नियुक्ति

पाकिस्तान में हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति को लेकर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और संघीय सरकार के बीच सीधा टकराव की स्थिति सामने है. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी के बिना ही जजों की नियुक्ति का नोटिफिकेशन जारी करने पर विचार कर रही है. जुलाई में ज्यूडिशियल कमीशन ऑफ पाकिस्तान (JCP) ने हाई कोर्ट में 19 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की सिफारिश की थी.
साथ ही पेशावर हाई कोर्ट के चार और लाहौर हाई कोर्ट के एक अतिरिक्त जज की सेवा पक्की करने तथा सिंध हाई कोर्ट के एक जज का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला लिया था. लेकिन, राष्ट्रपति जरदारी ने अब तक इस प्रस्ताव (समरी) को मंजूरी नहीं दी है, जिसकी वजह से कानून मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी नहीं किया.
दो हफ्ते का था समय
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, संविधान के अनुच्छेद 48(1) के तहत राष्ट्रपति को प्रस्ताव मिलने के दो हफ्ते के अंदर कार्रवाई करनी चाहिए थी. चूंकि समय सीमा बीत चुकी है, इसलिए सरकार खुद नोटिफिकेशन जारी कर सकती है. वहीं राष्ट्रपति कार्यालय के सूत्रों ने चेतावनी दी है कि प्रक्रिया को दरकिनार करने से राजनीतिक और कानूनी संकट पैदा हो सकता है. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच बातचीत से सुलझाना चाहिए.
इस देरी का असर पहले ही दिखने लगा है. पेशावर हाई कोर्ट के चार अतिरिक्त जज 4 अगस्त को अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद पद छोड़ चुके हैं. सिंध हाई कोर्ट के जज भी 29 जुलाई को पदमुक्त हो गए. इस्लामाबाद हाई कोर्ट में इस देरी के खिलाफ याचिका भी दायर की गई है, जिस पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कानून मंत्री अकील मलिक ने कहा है कि सरकार इस मामले को संवैधानिक दायरे में ही सुलझाएगी.
कब तक आ सकता है नोटिफिकेशन?
वकील लुकमान जफर चौधरी ने अपने वकील जाहिद आसिफ चौधरी के जरिए ये रिट याचिका दायर की थी. इसमें कोर्ट से राष्ट्रपति को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे JCP द्वारा अनुशंसित न्यायिक नियुक्तियों के लिए प्रधानमंत्री द्वारा भेजी गई समरी को मंजूरी दें. जस्टिस अरबाब मुहम्मद ताहिर ने गुरुवार को इस याचिका पर सुनवाई की.
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि JCP ने 20 और 21 जुलाई को हुई अपनी बैठकों में इन नियुक्तियों की सिफारिश की थी. उन्होंने कहा कि 15 दिन बीत जाने के बाद भी राष्ट्रपति ने तौर पर इस समरी को मंजूरी नहीं दी है. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि खबरों के अनुसार सरकार अगले 48 घंटों में नियुक्तियों के लिए नोटिफिकेशन जारी कर सकती है.











