खतरे में दीपक प्रकाश का मंत्री पद! NDA ने नहीं बनाया MLC उम्मीदवार, आज थी नामांकन की आखिरी तारीख

राज्यसभा के साथ-साथ बिहार विधान परिषद के चुनाव भी कराए जा रहे हैं. विधान परिषद की 10 सीटों पर नामांकन के लिए आज सोमवार को आखिरी तारीख है. लेकिन बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश नामांकन दाखिल नहीं कर पाएंगे क्योंकि एनडीए ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया है. ऐसे में उनका मंत्री पद खतरे में है क्योंकि वह अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश विधान परिषद के लिए अपना नामांकन दाखिल नहीं कर सकेंगे. एनडीए की ओर से उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया गया है, जबकि अन्य 9 प्रत्याशी आज एक साथ ही नामांकन दाखिल करेंगे. भोजपुरी गायक पवन सिंह और निशांत कुमार समेत सभी उम्मीदवार आज विधानसभा में पेपर दाखिल करेंगे.
दीपक प्रकाश को नहीं मिली उम्मीदवारी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइडेट (JDU) के 4-4 तो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान) के एक उम्मीदवार की ओर से नामांकन दाखिल किया जाएगा. जबकि राष्ट्रीय जनता दल की ओर से प्रत्याशी सुनील सिंह ने नामांकन दाखिल कर दिया है. हालांकि इन 10 प्रत्याशियों में दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं है, ऐसे में उनका मंत्री पद खतरे में दिख रहा है. वह अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं और नियम के मुताबिक मंत्री बनने के करीब 6 महीने के अंदर उन्हें किसी न किसी सदन का सदस्य बनना होगा.
दीपक प्रकाश को टिकट नहीं दिए जाने पर पार्टी के विधायक आलोक सिंह ने कहा कि यह एनडीए गठबंधन के शीर्ष स्तर का फैसला है, हम एनडीए के साथ हैं.
दूसरी ओर, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) प्रमुख नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने पर कल खुशी जताई, लेकिन उन्हें उपमुख्यमंत्री का दर्जा दिए बिना कैबिनेट में शामिल किए जाने पर निराशा जताई.
निशांत के साथ कैबिनेट में दीपक भी शामिल
कभी नीतीश कुमार के करीबी रहे और राज्यसभा सांसद कुशवाहा ने कल रविवार को कहा, “मैं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ मजबूती से खड़ा हूं और आगे भी खड़ा रहूंगा. मैं 2014 में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का समर्थन करने वाले शुरुआती लोगों में शामिल था लेकिन सच्चाई यह भी है कि बीजेपी के साथ हमारा कोई वैचारिक जुड़ाव नहीं है बल्कि हमारी विचारधारा जेडीयू से मेल खाती है. मेरी सहानुभूति अब भी उसी आंदोलन के साथ है.
कुशवाहा ने 2023 में जेडीयू छोड़ दी थी. तब उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी का लालू प्रसाद के राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में विलय करने के लिए सौदा हुआ है. उन्होंने कहा, “JDU में किसी के कहने से पहले से ही मैं निशांत के राजनीति में आने की वकालत कर रहा था. मेरा मानना था कि अपने पिता के सच्चे राजनीतिक उत्तराधिकारी केवल निशांत ही हो सकते हैं.” उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि निशांत आखिरकार मंत्री बने हैं लेकिन मुझे निराशा है कि वह सिर्फ मंत्री बनने के लिए राजी हो गए. उन्हें उपमुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए था.”
संयोग से उनके बेटे दीपक प्रकाश भी निशांत के साथ कैबिनेट में शामिल हैं. एक ओर जहां निशांत विधान परिषद चुनाव लड़कर कैबिनेट में अपनी जगह पक्की करने की तैयारी में हैं तो वहीं दीपक प्रकाश का भविष्य अधर में है. उपेंद्र कुशवाहा ने कल मीडिया से बातचीत में इशारे में कहा कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि आरएलएम को विधान परिषद की एक सीट मिलेगी.











