धान की खेती में नई तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल: डीएसआर और लाइन बोनी से लागत में 40% तक कमी, उत्पादन में बढ़ोतरी

धान उत्पादन में आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लाइन बोनी, सीड ड्रिल मशीन और डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक के जरिए कम पानी, कम मजदूरी और कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में यह तकनीक प्रभावी मानी जा रही है, जहां श्रमिकों की कमी और सिंचाई की समस्या बनी रहती है।
कम लागत में अधिक उत्पादन का दावा
विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक धान खेती में प्रति हेक्टेयर 75 से 80 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है, जबकि डीएसआर और लाइन बोनी तकनीक अपनाने पर केवल 30 से 35 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। कतारों में बुवाई होने से पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे उनकी वृद्धि बेहतर होती है। इससे खेती की लागत में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आने के साथ उत्पादन क्षमता में भी सुधार देखा गया है।
लाइन बोनी और डीएसआर तकनीक के फायदे
लाइन बोनी पद्धति में फसल की बुवाई निर्धारित दूरी और कतारों में की जाती है। इससे बीज की बचत होती है, खरपतवार नियंत्रण आसान होता है और उर्वरक तथा सिंचाई का बेहतर प्रबंधन संभव हो पाता है। वहीं डीएसआर तकनीक में नर्सरी तैयार कर रोपाई करने के बजाय बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं। इस पद्धति से समय और श्रम दोनों की बचत होती है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक डीएसआर तकनीक से 15 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत भी संभव है।
किसानों को मिल रहा बेहतर लाभ
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 से 50 किलोग्राम बीज उपयोग करने, कतारों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर तथा पौधों के बीच 5 से 7 सेंटीमीटर दूरी रखने की सलाह दी है। बालोद जिले के किसान प्रदीप साहू का कहना है कि वे पिछले एक दशक से सीड ड्रिल तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार इस पद्धति से खेती की लागत में 30 से 40 प्रतिशत तक कमी आई है, जबकि उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती परिस्थितियों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग धान उत्पादन को अधिक लाभकारी बना सकता है।











