तालाबों को बचाने की योजना अधूरी: एसटीपी तैयार, बिजली कनेक्शन के इंतजार में रुका संचालन

रायपुर शहर के ऐतिहासिक महाराजबंध और नरैया तालाबों को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं मिलने के कारण इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते नालों का गंदा पानी लगातार तालाबों में गिर रहा है, जिससे जल गुणवत्ता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
तीन साल की देरी के बाद भी शुरू नहीं हुआ प्रोजेक्ट
तालाब संरक्षण के उद्देश्य से वर्ष 2022 में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत महाराजबंध, नरैया और खो-खो तालाबों के लिए एसटीपी निर्माण कार्य शुरू किया गया था। योजना के अनुसार यह परियोजना 2023 तक पूरी हो जानी थी, लेकिन विभिन्न कारणों से निर्माण कार्य में लगातार देरी होती रही। वर्ष 2026 में प्लांट बनकर तैयार होने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं मिलने से इसे चालू नहीं किया जा सका है। महाराजबंध में 3 एमएलडी तथा नरैया और खो-खो तालाब में 1-1 एमएलडी क्षमता के एसटीपी स्थापित किए गए हैं।
गंदे पानी और जलकुंभी से बिगड़ रही तालाबों की हालत
एसटीपी शुरू नहीं होने के कारण नेहरू नगर क्षेत्र के नाले का गंदा पानी सीधे महाराजबंध तालाब में पहुंच रहा है। इससे तालाब में प्लास्टिक कचरा और जलकुंभी तेजी से बढ़ रही है। स्थानीय लोगों को दुर्गंध की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह नरैया और सरजूबांधा तालाब की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां नालों का पानी लगातार मिल रहा है और जल प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।
जून में संचालन शुरू कराने का दावा
महापौर मीनल चौबे ने परियोजना में देरी के लिए निर्माण एजेंसी की धीमी कार्यप्रणाली को जिम्मेदार बताया है। उनके अनुसार सिविल और विद्युत संबंधी अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं, लेकिन ट्रांसफार्मर के लिए बिजली लाइन नहीं जुड़ पाने से संचालन अटका हुआ है। निगम प्रशासन ने एजेंसी पर जुर्माना भी लगाया है और जून माह के भीतर एसटीपी शुरू कराने के निर्देश दिए हैं। एसटीपी के संचालन के बाद प्रतिदिन लगभग 5 एमएलडी शुद्ध पानी उपलब्ध हो सकेगा, जिससे तालाबों के संरक्षण और पर्यावरण सुधार में मदद मिलेगी।











