पंडवानी की अमर आवाज हुई खामोश: पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, कला जगत में शोक की लहर

भारतीय लोक कला जगत के लिए रविवार बेहद दुखद साबित हुआ। देश की विख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। रायपुर स्थित AIIMS के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) ने उनके निधन की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि उन्होंने रविवार तड़के करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सांस्कृतिक और कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है
लंबे समय से चल रहा था इलाज
जानकारी के अनुसार, तीजन बाई पिछले कई सप्ताह से रायपुर AIIMS में भर्ती थीं। उनकी तबीयत लगातार नाजुक बनी हुई थी। रविवार तड़के अचानक उनकी हालत और बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
पुरुषों के वर्चस्व को तोड़कर रचा इतिहास
तीजन बाई ने उस दौर में पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ को अपनाया, जब इस शैली पर परंपरागत रूप से पुरुष कलाकारों का वर्चस्व माना जाता था। सामाजिक विरोध, रूढ़ियों और तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से नई पहचान बनाई। हाथ में तंबूरा, बुलंद आवाज और प्रभावशाली अभिनय के साथ मंच पर उनकी प्रस्तुति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
देश-दुनिया में बिखेरी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान
महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली में जीवंत करने वाली तीजन बाई ने पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया। उन्होंने लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को विश्वमंच पर स्थापित किया।
कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति
तीजन बाई के निधन से लोक कला जगत ने अपनी सबसे बुलंद आवाजों में से एक को खो दिया है। उनके जाने से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा को अपूरणीय क्षति पहुंची है। उनकी कला, संघर्ष और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।











