US-इजराइल के खिलाफ जिहाद का आह्वान… हिज्बुल्लाह के समर्थन में मुज्तबा का संदेश

ईरान के सु्प्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ लड़ाई में अब जिहाद और प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता बचा है. उन्होंने यह भी कहा कि जब तक इजराइल लेबनान में अपने सैन्य हमले पूरी तरह और बिना किसी शर्त के बंद नहीं करता, तब तक ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध खत्म करने के लिए कोई समझौता नहीं हो सकता.
56 साल के मुज्तबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम और संगठन के लड़ाकों के नाम एक संदेश जारी किया. उन्होंने कहा कि ईरान, हिज्बुल्लाह की रक्षा को अपनी रणनीतिक जिम्मेदारी मानता है. उन्होंने मांग की कि इजराइल लेबनान पर अपने सभी सैन्य हमले तुरंत और बिना किसी शर्त के बंद करे.
हिज्बुल्लाह ने मुज्तबा को लेटर भेजा था
खामेनेई का यह संदेश हिज्बुल्लाह की ओर से भेजे गए उस पत्र के जवाब में आया, जिसमें संगठन ने ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक के प्रति अपनी निष्ठा और समर्थन जताया था. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल का सामना करने के लिए जिहाद और प्रतिरोध के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया के कई देश अब अमेरिका और इजराइल की नीतियों से परेशान हो चुके हैं.
हिज्बुल्लाह का संघर्ष प्रेरणा: मुज्तबा
मुज्तबा के मुताबिक, अमेरिका और जायोनी ताकतें लोगों की जान और आने वाली पीढ़ियों को नुकसान पहुंचा रही हैं. इसलिए उनके खिलाफ संघर्ष जारी रखना जरूरी है. मुज्तबा खामेनेई ने हिज्बुल्लाह की तारीफ करते हुए कहा कि यह संगठन इजराइल के हमलों के सामने चट्टान की तरह मजबूती से खड़ा रहा है. उन्होंने कहा कि हिज्बुल्लाह का संघर्ष दुनिया के उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है, जो अपने देशों को बाहरी दबाव और दखल से मुक्त कराना चाहते हैं.
मुज्तबा ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की नीति का जिक्र करते हुए कहा कि हिज्बुल्लाह की रक्षा करना ईरान की लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक नीति है. खामेनेई ने हिज्बुल्लाह के पूर्व महासचिव सैयद हसन नसरल्लाह समेत उन सभी लड़ाकों को श्रद्धांजलि दी, जो अमेरिका और इजराइल के हमलों में मारे गए. उन्होंने कहा कि उनके बलिदान ने हिज्बुल्लाह को एक छोटे पौधे से एक मजबूत और विशाल पेड़ बना दिया है और पूरे इस्लामी जगत में लेबनान का सम्मान बढ़ाया है.











