गुजरात फतह की तैयारी! प्रभारी बनते ही सुरजेवाला ने बनाया प्लान, कांग्रेस के लिए 3 मुद्दे किए फिक्स

अगले साल कई अहम राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों में सियासी हलचल बनी हुई है और अभी से ये दल खासे सक्रिय भी हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात भी उन राज्यों में शामिल है जहां पर अगले साल चुनाव होने हैं. कांग्रेस करीब 3 दशक से सत्ता पर काबिज बीजेपी को कड़ी चुनौती देने की तैयारी में है और पार्टी लगातार नई रणनीति बनाने में जुटी हुई है.

गुजरात में लंबे समय से सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सियासी टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने दिग्गज नेता रणदीप सुरजेवाला को राज्य में पार्टी का नया प्रभारी बनाया तो उन्होंने पार्टी के लिए नई रणनीति बनाकर सियासी रण में उतरने की तैयारी भी कर ली है.

कांग्रेस के लिए जीत के सूत्रधार सुरजेवाला

सूत्रों के मुताबिक, 2017 के विधानसभा चुनाव में गुजरात में जब कांग्रेस ने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी, तब मीडिया का जिम्मा संभालने वाले रणदीप सुरजेवाला ने चुनावी समर में अहम भूमिका निभाई थी. साथ ही सुरजेवाला की बड़ी पहचान कर्नाटक से भी जुड़ी हुई है. उन्हें सितंबर 2020 में कर्नाटक कांग्रेस का प्रभारी महासचिव बनाया गया था. फिर 2023 के चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की और कर्नाटक में सरकार बनाने में कामयाब रही.

इस लिहाज से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस को बतौर प्रभारी जीत दिलाने वाले सुरजेवाला को ही गुजरात का भी प्रभार सौंप दिया. सूत्रों के मुताबिक, नई जिम्मेदारी मिलने के बाद रणदीप ने गुजरात को लेकर खास तरह की रणनीति तैयार की. फिर बतौर गुजरात प्रभारी महासचिव ने गुजरात की पार्टी नेताओं से पहली मुलाकात के दौरान अपनी 3 खास रणनीति भी सामने रख दी.

BJP के खिलाफ रणनीति, 3 मुद्दों पर फोकस

सुरजेवाला ने पीएम मोदी के गढ़ में बीजेपी को मात देने और कांग्रेस की सत्ता में वापसी के लंबे इंतजार को खत्म करने की योजना को लेकर खास रणनीति बनाई है. सूत्रों के अनुसार, उनकी पहली रणनीति है कि गुजरात के चुनाव के दौरान राष्ट्रीय मुद्दों से अधिक स्थानीय और राज्य से जुड़े मुद्दों पर फोकस करना होगा.

उनकी दूसरी अहम रणनीति है कि कांग्रेस गुजरात चुनाव में पीएम मोदी और अमित शाह पर सीधे हमले करने से बचेगी. उसके सियासी हमले के केंद्र में राज्य से जुड़े मुद्दे, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री ही रहेंगे. तीसरी और खास बात ये भी है कि, चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी अडानी या अंबानी का नाम लेकर सीधा हमला करने से बचेगी. दरअसल, पार्टी को यह लगता है कि, गुजराती समाज व्यापार को खासा तरजीह देता है और उनके लिए उनके राज्य से आने वाले अडानी और अंबानी बड़े बिजनेस आइकॉन हैं.

अगले साल कई राज्यों में होने वाले चुनाव में बीजेपी ज्यादातर राज्यों में सत्तारुढ़ है और कांग्रेस भगवा पार्टी के दबदबे करने की जुगत में है. देश की सबसे पुरानी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से उत्साह में है क्योंकि उसे लग रहा है कि बीजेपी को अब हराया जा सकता है. इस चुनाव में बीजेपी अकेले अपने दम पर बहुमत नहीं जुटा सकी थी और वह महज 240 सीटों पर सिमट गई थी. यहां तक कि इंडिया गठबंधन ने बीजेपी के लिहाज बहुत ही अहम सीट अयोध्या पर भी कब्जा जमा लिया था.

राहुल ने कहा था- गुजरात में भी हराएंगे

चुनाव परिणाम के बाद जुलाई 2024 में राहुल गांधी ने पार्टी से जुड़े एक कार्यक्रम में कहा था कि इंडिया’ गठबंधन ने अयोध्या में बीजेपी को हराकर उसके राम मंदिर आंदोलन को पराजित कर दिया है. उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि अगले चुनाव में बीजेपी का गुजरात में भी यही हश्र होगा.

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जीपीसीसी) ऑफिस के बाहर तब झड़प हो गई थी, जब बीजेपी के कार्यकर्ता हिंदुओं पर राहुल गांधी की टिप्पणी के खिलाफ प्रदर्शन करने वहां गए थे. राहुल गांधी ने कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि हम सब मिलकर उनकी सरकार को उसी तरह तोड़ देंगे जैसे उन्होंने हमारे ऑफिस को नुकसान पहुंचाया. आप लोग यह लिखकर ले लीजिए कि कांग्रेस गुजरात में भी चुनाव लड़ेगी और पीएम मोदी तथा बीजेपी को गुजरात में हराएगी, जैसा हमने अयोध्या में किया था.”

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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