चीन को टक्कर देगा बिहार का गया और बांका, क्रिटिकल मिनिरल्स से ऐसे बदलेगी तस्वीर

बिहार अब केवल खेती और ऐतिहासिक विरासत के लिए ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य के इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के लिए भी अहम राज्य बनकर उभर सकता है. दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी बिहार के कई जिलों में क्रिटिकल मिनरल्स की मौजूदगी ने राज्य सरकार का ध्यान अपनी ओर खींचा है. इनमें गया और बांका सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, क्योंकि यहां ऐसे मिनरल्स मिलने की संभावना जताई गई है जिनकी ग्लोबल मार्केट में भारी मांग है. निकेल, क्रोमियम, मैग्नेटाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, तांबा, जस्ता और सीसा जैसे मिनरल्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बैटरी, सोलर एनर्जी, सेमीकंडक्टर, डिफेंस इक्विपमेंट और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने में होता है. आज भारत इन मिनरल्स की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से इंपोर्ट करता है, जबकि चीन की इस सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़ है. ऐसे में अगर बिहार में इन संसाधनों का कमर्शियल माइनिंग शुरू होता है तो इससे सिर्फ राज्य की इकोनॉमी ही नहीं, बल्कि देश की इंडस्ट्रियल और स्ट्रैटेजिक ताकत भी मजबूत होगी. यही वजह है कि राज्य सरकार अब इन मिनरल्स की नीलामी और माइनिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार के साथ तेजी से काम करने की तैयारी कर रही है.

राज्य सरकार अब इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की तैयारी में है. खान एवं भू-तत्व विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार जल्द ही अधिकारियों की टीम के साथ दिल्ली जाकर केंद्रीय मंत्री और संबंधित अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. इस दौरान खनिज क्षेत्रों के साइंटिफिक सर्वे, वैल्यूएशन, नीलामी और कमर्शियल माइनिंग को लेकर चर्चा होगी. सरकार का मानना है कि अगर सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी होती हैं तो बिहार आने वाले वर्षों में देश के बड़े खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है. इससे निवेश, इंडस्ट्री और रोजगार के नए मौके भी बनेंगे.

किन जिलों में मिले हैं महत्वपूर्ण मिनरल्स?

खान एवं भू-तत्व विभाग के अनुसार दक्षिण बिहार के पहाड़ी इलाकों में सबसे ज्यादा संभावनाएं सामने आई हैं. गया, रोहतास, जमुई, जहानाबाद, बांका और भागलपुर समेत कई जिलों में अलग-अलग तरह के महत्वपूर्ण मिनरल्स की पहचान की गई है. इनमें निकेल, क्रोमियम, मैग्नेटाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, ग्लोकोनाइट, पाइराइट, तांबा, जस्ता और सीसा (लेड) शामिल हैं. इन मिनरल्स का इस्तेमाल बैटरी, स्टील, उर्वरक, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिफेंस इक्विपमेंट और आधुनिक मशीनों के निर्माण में होता है. अगर इनका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होता है तो बिहार में इंडस्ट्रियल एक्टिविटी तेजी से बढ़ सकती है.

भारत को ऐसे होगा फायदा

क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में भारत काफी हद तक विदेशी देशों पर निर्भर है. अपनी जरूरत का करीब 80-90 फीसदी मिनरल्स बाहर से इंपोर्ट करता है. ऐसे में बिहार जैसे राज्य में अगर इन मिनरल्स की उपलब्धता बढ़ती है तो देश को इसका सीधा फायदा मिलेगा. अभी भारत रेयर अर्थ मिनरल्स का सबसे ज्यादा इंपोर्ट चीन से करता है. आने वाले समय में इस पर निर्भरता कम हो सकती है. आंकड़े बताते हैं कि भारत हर साल चीन से करीब 300 करोड़ रुपये के रेयर अर्थ मिनरल्स खरीदता है. अगर देश में इन क्रिटिकल मिनरल्स का प्रोडक्शन बढ़ेगा तो इंपोर्ट भी कम होगा. इससे इंपोर्ट बिल घटेगा और देश की इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी. वैसे सिर्फ बिहार ही नहीं, देश के कई दूसरे राज्यों में भी क्रिटिकल मिनरल्स मौजूद हैं. खासकर तटीय इलाकों में इनकी अच्छी उपलब्धता है.

भारत के इन राज्यों में भी रेयर अर्थ

भारत में रेयर अर्थ मिनरल्स मुख्य रूप से समुद्र तट की बीच सैंड और कुछ अंदरूनी खनिज इलाकों में पाए जाते हैं. केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा इस मामले में सबसे अहम राज्य माने जाते हैं. केरल के कोल्लम जिले का चवरा इलाका मोनाजाइट, इल्मेनाइट, रूटाइल और जिरकॉन जैसे मिनरल्स के लिए जाना जाता है. तमिलनाडु के तिरुनेलवेली और तूतिकोरिन तट पर भी मोनाजाइट अच्छी मात्रा में मिलता है, जिससे नियोडिमियम और प्रसीओडिमियम जैसे रेयर अर्थ एलिमेंट्स निकाले जा सकते हैं. आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम और विशाखापट्टनम तट पर भी भारी खनिज पाए जाते हैं. वहीं ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान और कर्नाटक में भी ऐसे मिनरल्स की संभावनाओं को लेकर लगातार सर्वे किया जा रहा है.

क्रिटिकल मिनरल्स क्या हैं?

क्रिटिकल मिनरल्स ऐसे जरूरी खनिज होते हैं जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, बैटरी, सोलर पैनल, डिफेंस इक्विपमेंट, स्पेस टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और दूसरे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है. ग्रीन एनर्जी और डिजिटल टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि दुनिया के कई देश इन मिनरल्स के नए स्रोत खोजने और अपनी सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं.

बिहार में क्रिटिकल मिनरल्स की पहचान अभी शुरुआती स्टेज में है और कमर्शियल माइनिंग शुरू होने में अभी समय लगेगा. हालांकि अब तक मिले आंकड़े बताते हैं कि अगर सर्वे, नीलामी और माइनिंग की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो गया और बांका समेत दक्षिण बिहार के कई जिले देश की खनिज इकोनॉमी में अहम भूमिका निभा सकते हैं. भारत पहले से ही क्रिटिकल मिनरल्स के घरेलू स्रोत बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है और अलग-अलग राज्यों में नए भंडार तलाशे जा रहे हैं. ऐसे में बिहार का योगदान सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देश की इंपोर्ट निर्भरता कम करने, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बढ़ाने और रणनीतिक खनिजों की घरेलू उपलब्धता मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभा सकता है.

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पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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