चुनाव आयोग के लिए मुश्किल दौर, एक ही दिन SC और HC दोनों से ही पड़ी कड़ी फटकार

चुनाव आयोग इन दिनों हर ओर से सवालों से घिर गया है. विपक्ष आयोग पर निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है. विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा जा रहा है तो वहीं चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट समेत 2 कोर्ट से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा.
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर एक समय-सीमा तय करने को कहा है, तो वहीं कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम उपचुनाव से पहले लिफाफा (envelope) चुनाव चिह्न बदलने को लेकर चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की है. उपचुनाव में, कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने की इजाजत भी मिल गई.
TMC चुनाव चिह्न विवाद और सुप्रीम कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से कहा कि वह ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और जोड़ा घास-फूल चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसले के लिए एक उचित समय-सीमा के बारे में बताए. सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से दायर की गई थी.
TMC को लेकर ममता बनर्जी गुट और ऋृतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट दोनों ने ही अपने-अपने दावे किए थे. शिवसेना मामले में हुई लंबी देरी का हवाला देते हुए, 3 जजों की बेंच ने आयोग से कहा कि TMC विवाद को जल्द से जल्द सुलझाया जाना चाहिए. मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी.
लिफाफा को लेकर HC ने की आलोचना
दूसरी ओर, कोलकाता में, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) से लिफाफा (चुनाव चिह्न) वापस लेने और उसे नई बनी डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को आवंटित करने को लेकर चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की. जस्टिस कृष्णा राव ने सुनवाई के दौरान सवाल किया कि जब आपके पास 183 फ्री चुनाव चिह्न मौजूद थे, तो फिर यह बदलाव क्यों किया गया?
हाईकोर्ट ने आयोग को नसीहत देते हुए कहा कि उसे निष्पक्ष और बिना भेदभाव के काम करना चाहिए, खासकर तब जब ISF भी नंदीग्राम चुनावी मैदान में है. कोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई टाल दी और चुनाव आयोग से मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगी है.
नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार प्रधान को राहत
वहीं, नंदीग्राम उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल के बाद करीब 20 साल पहले 2007 के पुराने मामलों में गिरफ्तार किए गए कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को हाईकोर्ट की दो अलग-अलग बेंचों से राहत मिल गई है. एक बेंच ने सरकार को उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत देने का मौखिक निर्देश दिया, जबकि दूसरी बेंच ने आदेश सुनाया कि पुलिस एक खास मामले में 12 अक्टूबर तक उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई न करे और उस मामले में उन्हें गिरफ्तार भी नहीं माना जाए. यहां पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव कराया जाना है.
कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसकी अगुवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.वी. घुगे कर रहे थे, ने कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 के एक मामले में रेगुलर जमानत देने का निर्देश दिया है और उन्हें पहले मिली सुरक्षा को रद्द कर दिया. बेंच ने ऐसी सुरक्षा देने के सिंगल जज के फैसले पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह मामला जमानत पर विचार करने लायक था. बेंच ने कहा कि प्रधान को कानून के तहत उपलब्ध रास्ते को अपनाना होगा.











