बिलासपुर मुक्तिधाम में लावारिस शवों के दफन पर सवाल, कम गहराई वाली कब्रों से सामने आई गंभीर लापरवाही

बिलासपुर के सरकंडा स्थित जबड़ापारा मुक्तिधाम में लावारिस शवों के दफन को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि शवों को निर्धारित मानकों के विपरीत केवल दो फीट या उससे भी कम गहराई में दफनाया जा रहा है। बारिश के दौरान मिट्टी बह जाने से कई कब्रें खुल गईं और आवारा कुत्ते शवों को बाहर निकालने लगे। इस घटना ने शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, मुक्तिधाम परिसर में कई स्थानों पर मानव अवशेष, हड्डियां, मिट्टी से बाहर निकली खोपड़ियां और फटे कपड़े दिखाई दिए। पूरे इलाके में दुर्गंध फैलने से आसपास रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिसर में सुरक्षा और निगरानी की समुचित व्यवस्था नहीं है।
बताया जा रहा है कि पुलिस की निगरानी में हर महीने 10 से 12 लावारिस शव यहां दफनाए जाते हैं। हालांकि पहचान की संभावना बनाए रखने के तर्क के साथ शवों को कम गहराई में दफनाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। बारिश के दौरान मिट्टी बहने के बाद यही व्यवस्था गंभीर समस्या बन गई और आवारा जानवर कब्रें खोदकर शवों को बाहर निकालने लगे।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि मुक्तिधाम में स्थायी कर्मचारियों की तैनाती नहीं होने से देखरेख प्रभावित है। शवों के दफन के दौरान भी पर्याप्त गहराई तक गड्ढा नहीं खोदा जाता। साथ ही मुक्तिधाम का मुख्य प्रवेश द्वार अक्सर खुला रहने के कारण आवारा पशु आसानी से परिसर में प्रवेश कर जाते हैं।
मुक्तिधाम के आसपास अब घनी आबादी बस चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा, रखरखाव और दफन प्रक्रिया में आवश्यक सुधार नहीं किए गए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर शवों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था सुनिश्चित करने, परिसर की सुरक्षा बढ़ाने और दफन प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप लागू करने की मांग की है।











