टाटा ट्रस्ट्स में बड़ा बदलाव! अगस्त में कार्यकाल खत्म होने के बाद सर रतन टाटा ट्रस्ट छोड़ेंगे विजय सिंह

टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह 14 अगस्त को सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी का पद छोड़ देंगे. उस दिन उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म हो रहा है. वह लंबे समय से ट्रस्ट के साथ जुड़े हुए थे. यह खबर ऐसे समय पर आई है, जब जब ट्रस्ट आंतरिक मतभेदों और रेगुलेटरी जांच का सामना कर रहे हैं. 78 साल के विजय सिंह ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि उन्होंने अगला कार्यकाल न लेने का फैसला किया है.
उन्होंने कहा कि रतन टाटा के निधन के बाद ट्रस्ट में बदले माहौल ने चिंता पैदा की है और भविष्य को लेकर संदेह खड़ा किया है. मैं अपनी मौजूदा उम्र के बाद SRTT में बने नहीं रहना चाहता और मौजूदा कार्यकाल के बाद किसी अन्य ट्रस्ट में भी दोबारा नियुक्ति नहीं चाहूंगा. हालांकि, सिंह एक और साल तक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी बने रहेंगे. उनका यह फैसला कई ऐसी घटनाओं के बाद आया है जिनसे टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेद सामने आए हैं. टाटा ट्रस्ट्स, होल्डिंग कंपनी टाटा संस की 66 फीसदी मालिक है.
मई में TEDT से दिया था इस्तीफा
मई में, सिंह और साथी वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) से इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने उनकी दोबारा नियुक्ति का विरोध किया था. मिस्त्री ने ‘बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन’ के ट्रस्टी के तौर पर सिंह और श्रीनिवासन की योग्यता को चुनौती दी थी.
उन्होंने तर्क दिया था कि वे 1923 के ट्रस्ट डीड की शर्तों को पूरा नहीं करते, जिसके अनुसार ट्रस्टी का पारसी जोरोस्ट्रियन होना और मुंबई का स्थाई निवासी होना जरूरी है. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि टाटा संस की संभावित लिस्टिंग के पक्ष में सिंह की पिछली सार्वजनिक टिप्पणियों के कारण, SRTT में अगले कार्यकाल के लिए उन्हें साथी ट्रस्टियों से सर्वसम्मत समर्थन मिलने की संभावना भी कम थी.
उनका यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सर रतन टाटा ट्रस्ट बोर्ड की बैठकें नहीं कर पा रहा है. महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने स्थाइ ट्रस्टियों की नियुक्ति और अन्य संबंधित मुद्दों पर शिकायत पर फैसला होने तक ट्रस्ट को बैठकें करने से रोक दिया है. SRTT बोर्ड में चेयरमैन नोएल एन टाटा, वेणु श्रीनिवासन, विजय सिंह, जिमी एन टाटा, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा शामिल हैं.
टाटा संस पर सिंह का रुख अलग रुख
सर रतन टाटा ट्रस्ट और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट मिलकर टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की ज़्यादातर हिस्सेदारी रखते हैं. मई में, ट्रस्ट्स को टाटा संस बोर्ड में अपने प्रतिनिधित्व की समीक्षा करनी थी, जिसमें नॉमिनी डायरेक्टरों की नियुक्ति भी शामिल थी, लेकिन चल रही कानूनी कार्यवाही के बीच उन बैठकों को टाल दिया गया. एजेंडा में टाटा संस को लिस्ट करने के संभावित फायदों पर सिंह और श्रीनिवासन की सार्वजनिक टिप्पणियों पर चर्चा भी शामिल होने की उम्मीद थी.
उनकी बातों को चेयरमैन नोएल टाटा के नेतृत्व वाले ट्रस्ट्स के मौजूदा रुख से अलग माना गया, जो टाटा संस को प्राइवेट कंपनी बनाए रखने के पक्ष में हैं. पिछले साल सिंह को टाटा संस के बोर्ड में दोबारा नियुक्त नहीं किया गया था. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि ट्रस्ट्स यह पक्का करना चाहते थे कि टाटा संस के बोर्ड में उनके नॉमिनी, कंपनी के मालिकाना हक के ढांचे समेत गवर्नेंस से जुड़े अहम मुद्दों पर संस्थान के रुख को ही आगे बढ़ाएं.











