10,933 करोड़ घोटाला: जांच एजेंसियां छह साल से कर रही कार्रवाई

छत्तीसगढ़ में पिछले पांच-छह वर्षों के दौरान सामने आए आठ बड़े घोटालों ने भ्रष्टाचार के बड़े नेटवर्क की परतें खोल दी हैं। इसमें कोल लेवी, शराब, डीएमएफ और महादेव सट्टा जैसे मामलों में कुल 10,933 करोड़ रुपए की कथित अनियमितताओं की जांच चल रही है। आईटी, ईडी, ईओडब्ल्यू और सीबीआई ने अब तक 5,378 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां अटैच की हैं।

इनमें आईएएस, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, कारोबारी और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं। अंतिम न्यायिक फैसला आने तक इन संपत्तियों का उपयोग तो किया जा सकेगा, लेकिन उन्हें बेचा, हस्तांतरित या उन पर नया निर्माण नहीं किया जा सकेगा।

दोष सिद्ध हुआ तो ये सारी संपत्तियां सरकार के अधिकार में चली जाएंगी। राजसात की प्रक्रिया के बाद इन्हें नीलाम कर राशि सरकारी खजाने में जमा की जाएगी। कानून के जानकारों ने बताया कि एजेंसी जब भी किसी घोटाले की जांच करती है तो उसमें आय के स्रोत और उससे मिले अवैध पैसे से किए गए निवेश की जानकारी निकालती है।

घोटाले या काली कमाई से खरीदी गई या निवेश की प्रॉपर्टी को एजेंसी अस्थाई कुर्क या अटैच करती है। इसे लेकर अपील की जा सकती है। इसमें प्रॉपर्टी मालिक कोर्ट में साबित कर सकता है कि वह वैध कमाई या पैतृक संपत्ति है। साबित होने पर प्रॉपर्टी से अटैचमेंट हटा दिया जाता है।

5 साल में कैसे हुए 8 घोटाले :

-शराब- शराब की अवैध बिक्री, सप्लाई और कमीशन के जरिए राजस्व में हेराफेरी कर 3200 करोड़ का घोटाला किया गया।

-कोल- कोल परिवहन और कारोबार पर प्रति टन 25 रुपए की अवैध लेवी वसूलकर 540 करोड़ रुपए सिंडिकेट ने बांटें।

-डीएमएफ- खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बने फंड से 575 करोड़ का कमीशन लेकर घटिया सामग्री की खरीदी और फर्जी भुगतान किया गया।

-सीजीएमएससी- अस्पतालों और हमर लैब के लिए उपकरण व मशीनों की खरीदी में नियमों की अनदेखी कर 411 करोड़ में खरीदी का आरोप।

– कस्टम मिलिंग- राइस मिलरों से कस्टम मिलिंग के बदले कथित 175 करोड़ की किकबैक और अवैध वसूली की गई।

-भारतमाला- फर्जी दस्तावेज और मिलीभगत से सड़क परियोजना के लिए 75 करोड़ का मुआवजा हासिल किया गया।

– सीजीपीएससी- भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता, पक्षपात और प्रभाव का इस्तेमाल कर चयन में गड़बड़ी करने के आरोप।

– महादेव सट्‌टा- बेटिंग एप बनाकर सरकार व पुलिस के सरंक्षण चलाया गया। इससे 6000 करोड़ की प्रमोटर को मिले।

इनकी संपत्तियां अटैच

महादेव सट्टा: प्रमोटर सौरभ चंद्राकर की दुबई के बुर्ज खलीफा, दुबई हिल्स एस्टेट और बिजनेस बे में करीब 1,700 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच। विकास गर्ग की 940.77 करोड़, हरिशंकर तिबरेवाल की 388 करोड़, रवि उप्पल की 21.45 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच। {कोल लेवी: सूर्यकांत तिवारी और उसके करीबियों की 150 करोड़ रुपए, राप्रसे की अधिकारी सौम्या चौरसिया की 23 करोड़, निलंबित आईएएस रानू साहू की 5.52 करोड़, समीर विश्नोई की 4 करोड़ की संपत्ति अटैच।

शराब घोटाला: रिटायर आईएएस अनिल टुटेजा, आईटीएस एपी त्रिपाठी, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल समेत अन्य की 1200 करोड़ों रुपए की संपत्तियां अटैच। {भारतमाला: हरमीत सिंह खनूजा, खेमराज कोसले, पुनूराम देशलहरे समेत अन्य की 23.35 करोड़ की संपत्ति अटैच।

डीएमएफ: आईएएस रानू साहू, संजय शिंदे, मनोज द्विवेदी समेत आरोपियों की 21.47 करोड़ रुपए संपत्ति अटैच। {सीजीएमएससी: कारोबारी शशांक चोपड़ा और तत्कालीन अधिकारियों की करीब 40 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच। {कस्टम मिलिंग: आईटीएस मनोज सोनी, रोशन चंद्राकर समेत आरोपियों की 19.39 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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