किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र पर कोई कार्रवाई ना हो, जंतर-मंतर प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले की सुनवाई के बाद बड़ा आदेश पारित किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. चीफ जस्टिस ने इससे पहले सुनवाई के दौरान अपनी टिप्पणी में कहा था कि लोकतंत्र में प्रदर्शन होते रहते हैं. उन्होंने कहा कि मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो.

जिम्मेदारी तय होनी जरूरी- चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिसने भी ज्यादती की है उसके खिलाफ कानून अपना काम करेगा. उन्होंने कहा कि इसकी जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और स्वतंत्र होनी चाहिए. चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो जांच का कोई मतलब नहीं.

पेलेट गन का हुआ जिक्र

CJI सूर्यकांत ने कहा कि सभी पिटीशन में कुछ आरोप हैं. लेकिन अगर आप मोटे तौर पर देखें तो एक आरोप है पेलेट गन का इस्तेमाल, जिसकी वजह से 19 साल के लड़के की आंखों की रोशनी चली गई. इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के मामले के आरोप हैं. एक युवती को ICU में भर्ती कराया गया. कील वाली लाठियों के इस्तेमाल से जान का खतरा का आरोप. एक मीडियाकर्मी पर हमले का भी मामला है. उस पर बेरहमी से हमला किया गया. फिर सिविल ड्रेस में पुलिस ने हिंसा का आरोप है. एक और मामला जिसमें युवती को बिना उकसावे के पुलिसवाले ने थप्पड़ मारा था.

सरकार की दलील

केंद्र और दिल्ली सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों पर बल प्रयोग को हल्के में नहीं ले रही है. ऐसे में कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन इस प्रदर्शन के दौरान 250 पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. सही जांच कर सच्चाई बाहर आनी चाहिए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मेहता को टोकते हुए कहा कि इसीलिए हम चाहते हैं कि जांच हो. तब मेहता ने कहा कि मैं नहीं समझता कि छात्रों ने हिंसा की. इसमें असमाजिक तत्व घुसे होंगे. उन्होंने कहा कि हमें असामाजिक तत्वों का डेटा पेश करेंगे. उन्होंने दावा किया ऐसे लोग प्रदर्शन में शामिल थे जो हत्या, रेप और NDPS केसों में शामिल थे.

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
close
Virus-free.www.avast.com