नर्सिंग कॉलेजों में 100% महिला आरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर स्वास्थ्य सचिव और पीएससी सचिव को नोटिस

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण के मामले में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने तीन वर्ष पहले महिला आरक्षण को असंवैधानिक बताते हुए पुरुष अभ्यर्थियों को भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक इसका पालन नहीं किए जाने पर स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) के सचिव डी. राहुल वेंकट को अवमानना नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद होगी।

मामला वर्ष 2021 में जारी उस भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में डिमॉन्स्ट्रेटर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर केवल महिला अभ्यर्थियों को आवेदन की अनुमति दी गई थी। इस विज्ञापन को पुरुष अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इसे संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन बताया था।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बीएससी नर्सिंग और एमएससी नर्सिंग पाठ्यक्रमों में पुरुष और महिला दोनों को समान रूप से प्रवेश दिया जाता है, ऐसे में पढ़ाई पूरी करने के बाद अध्यापन पदों पर केवल महिलाओं को अवसर देना भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने महिलाओं के पक्ष में दलील देते हुए कहा था कि नर्सिंग सेवा में महिलाओं की भूमिका अधिक होने के कारण संविधान के अनुच्छेद 15(3) के तहत उन्हें विशेष संरक्षण और आरक्षण दिया जा सकता है। हालांकि, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को रद्द करते हुए पुरुष अभ्यर्थियों को भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया।

अदालत के फैसले के बाद भी स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने भर्ती नियमों में संशोधन नहीं किया। पीएससी ने मार्च 2023 में चिकित्सा शिक्षा विभाग को संशोधित मांग पत्र और नए नियम भेजने के लिए पत्र भी लिखा था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अभ्यर्थियों द्वारा आवेदन देने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में बदलाव नहीं किया गया।

इसी बीच 22 जून 2026 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डिमॉन्स्ट्रेटर के पदों पर संविदा भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया। इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना बताते हुए अवमानना याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्वास्थ्य सचिव और पीएससी सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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