करेंसी की नई टेक्नोलॉजी: कैसे BOPP शीट, फॉइल और UV ट्रीटमेंट से तैयार होता है प्लास्टिक नोट

भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक ने 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक नोटों के ट्रायल को मंजूरी दे दी है. इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट कैसे तैयार किए जाते हैं. इन नोटों में कौन सी टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है और ये कागज के नोटों से कैसे अलग होते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं प्लास्टिक नोट बनने का पूरा प्रोसेस.
ऑस्ट्रेलिया से शुरू हुआ प्लास्टिक नोटों का सफर
प्लास्टिक नोटों का आविष्कार डेविड सोलोमन ने किया था. इस प्रोजेक्ट पर 1988 में ऑस्ट्रेलिया के रिजर्व बैंक के अनुरोध पर काम शुरू हुआ और इसे पूरा होने में करीब 20 साल लगे. ऑस्ट्रेलिया ने 1988 में पहला 10 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का पॉलीमर नोट जारी किया. इसके बाद 1996 तक वह अपनी पूरी करेंसी को पॉलीमर नोटों में बदलने वाला पहला देश बन गया. बाद में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने भी 2016 में सर विंस्टन चर्चिल वाले 5 पाउंड के पॉलीमर नोट के साथ इस तकनीक को अपनाया.
BOPP टेक्नोलॉजी और सिक्योरिटी फीचर्स बनाते हैं खास
प्लास्टिक नोटों का आधार बीओपीपी यानी बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन नाम का ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक मटेरियल होता है. इसमें कोई रेशा या छेद नहीं होता, इसलिए यह पानी, गंदगी और पसीना नहीं सोखता. नोट का एक हिस्सा पारदर्शी छोड़ा जाता है, जिससे इसे स्कैनर या प्रिंटर से कॉपी करना लगभग असंभव हो जाता है. इसके अलावा इनमें डिफ्रेक्शन ग्रेटिंग और ऑप्टिकली वेरिएबल डिवाइसेज जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी वजह से अलग-अलग एंगल से देखने पर नोट का रंग और पैटर्न बदलता दिखाई देता है.
BOPP शीट से UV ट्रीटमेंट तक ऐसा बनता है नोट
रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे पहले ट्रांसपेरेंट पॉलीमर शीट यानी बीओपीपी तैयार की जाती है. इसके दोनों तरफ नोट का डिजाइन और तस्वीरें छापी जाती हैं. इसके बाद शीट को फॉइलिंग मशीन में भेजा जाता है, जहां सुरक्षा फीचर्स वाले फॉयल टेप लगाए जाते हैं. प्रिंटिंग पूरी होने के बाद नोट को यूवी ट्रीटमेंट दिया जाता है और उस पर एक सुरक्षा परत चढ़ाई जाती है, ताकि स्याही लंबे समय तक सुरक्षित रहे. आखिर में बड़ी शीट को गिलोटिन कटर से काटकर अलग-अलग नोट तैयार किए जाते हैं. तैयार नोटों की कई तरह की टेस्टिंग भी होती है, ताकि वे एटीएम और कैश काउंटिंग मशीनों के साथ सही तरीके से काम कर सकें.
कागज के नोटों से क्यों बेहतर माने जाते हैं पॉलीमर नोट
साधारण बैंक नोट कॉटन कॉम्बर और लिंटर के लंबे रेशों से बनाए जाते हैं. इनमें सुरक्षा धागा जोड़ने के लिए ब्रिटेन की पोर्टल्स कंपनी की विंडोड थ्रेड तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं पॉलीमर नोट ज्यादा मजबूत माने जाते हैं और इनकी उम्र कागज के नोटों की तुलना में करीब 2.5 गुना अधिक होती है. ये पूरी तरह वॉटरप्रूफ होते हैं, पानी में खराब नहीं होते, आसानी से फटते नहीं हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं. यही वजह है कि दुनिया के कई देशों ने इनका इस्तेमाल शुरू कर दिया है.











