छत पर सोलर, घर में बचत… पूर्णिया के गांवों में ‘PM सूर्य घर योजना’ बनी वरदान, बिजली बिल हुआ जीरो!

कभी हर महीने बिजली बिल की चिंता में रहने वाले कई परिवार अब अपनी ही छत पर बिजली पैदा कर रहे हैं. केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ ने पूर्णिया जिले के गांवों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है. अब तक जिले के 281 परिवारों ने अपने घरों की छत पर रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है. इसका सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि कई परिवारों का मासिक बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है. घरेलू खर्च में कमी आने से लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. वे खुद को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर महसूस कर रहे हैं.
गांवों में बढ़ रही जागरूकता
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन लगातार अभियान चला रहा है. जिलाधिकारी अंशुल कुमार स्वयं योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. सभी प्रखंडों में विशेष शिविर लगाकर लोगों से आवेदन लिए जा रहे हैं और पात्र लाभुकों को कम ब्याज पर ऋण भी स्वीकृत किया जा रहा है.
योजना का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचे, इसके लिए जीविका दीदी, पीडीएस दुकानदार, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं को भी जिम्मेदारी दी गई है. ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को सोलर रूफटॉप लगाने के फायदे समझा रही हैं और आवेदन कराने में मदद कर रही हैं. इसी जागरूकता अभियान का परिणाम है कि जिले में लगातार लोग इस योजना से जुड़ रहे हैं.
सिर्फ घर ही नहीं, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र भी हो रहे रोशन
सौर ऊर्जा का लाभ अब केवल घरों तक सीमित नहीं रह गया है. गांवों के सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य उपकेंद्र भी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं. नियमित बिजली उपलब्ध होने से स्कूलों में स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर और कंप्यूटर के जरिए डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिल रहा है. बच्चों की पढ़ाई पहले की तुलना में अधिक आसान और आधुनिक हो गई है. वहीं स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बिजली की निर्बाध आपूर्ति होने से दवाइयों और टीकों को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखना संभव हो रहा है. बिजली कटौती की समस्या कम होने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार देखा जा रहा है.
25 साल तक मिलेगा फायदा, रख-रखाव भी आसान
विद्युत कार्यपालक अभियंता बालवीर प्रसाद वागीश ने बताया कि जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत अब तक 281 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि सोलर रूफटॉप सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी लंबी आयु है. एक बार संयंत्र लगने के बाद यह लगभग 25 वर्षों तक बिजली उत्पादन करता है. सामान्य रख-रखाव के साथ उपभोक्ता लंबे समय तक इसका लाभ उठा सकते हैं.
अभियंता बालवीर प्रसाद वागीश ने बताया कि परियोजना प्रबंधक को पर्याप्त मैनपावर उपलब्ध कराया गया है. रोजाना लगने वाले सोलर पैनल के अनुसार सभी आवश्यक सामग्रियों का पर्याप्त बफर स्टॉक भी रखा गया है, ताकि काम में किसी तरह की बाधा न आए. अब जिले के कई उद्यमी भी इस योजना में रुचि दिखा रहे हैं.
कुटीर ज्योति योजना से गरीब परिवारों को मिलेगा मुफ्त सोलर
जिले में कुटीर ज्योति (यूएलए) निःशुल्क रूफटॉप सोलर योजना के तहत पात्र परिवारों को 1.1 किलोवाट क्षमता का निःशुल्क रूफटॉप सोलर संयंत्र उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी सौर ऊर्जा का लाभ उठा सकेंगे.
सरकार दे रही मोटी सब्सिडी और सस्ता लोन
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत उपभोक्ताओं को आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है. इसके अलावा केवल 6 प्रतिशत की न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक परिवार इस योजना का लाभ उठा सकें.
- 1 किलोवाट सोलर संयंत्र पर 30 हजार रुपए की सब्सिडी.
- 2 किलोवाट पर 60 हजार रुपए की सब्सिडी.
- 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के संयंत्र पर 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी.
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
ऑनलाइन आवेदन PM सूर्य घर पोर्टल और PM Surya Ghar App के माध्यम से किया जा सकता है. इसके अलावा नजदीकी विद्युत कार्यालय में भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध है. आवदेन करते समय आपको ये दस्तावेज देने होंगे…
- आधार कार्ड.
- मोबाइल नंबर.
- बिजली उपभोक्ता संख्या.
- बैंक पासबुक की प्रति.
- छत के स्वामित्व का प्रमाण पत्र.
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता पूर्णिया
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पूर्णिया में सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का नया मॉडल बनती दिखाई दे रही है. जिन गांवों में कभी बिजली बिल लोगों के लिए बोझ था, वहीं अब सोलर ऊर्जा से घर रोशन हो रहे हैं. बिजली बिल में भारी बचत, पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और आर्थिक मजबूती… इन सभी बदलावों ने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो तो वे सचमुच गांवों की तस्वीर बदल सकती हैं.











