भारतीय कंपनी पर ईरान की मदद का आरोप, अमेरिका ने लिया एक्शन; लगाया बैन

ईरान की एयरलाइन महान एयर को समर्थन देने के आरोप में अमेरिका भारत की एक कंपनी समेत छह संस्थाओं और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं.अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि इन संस्थाओं ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को वित्तीय, लॉजिस्टिक और व्यावसायिक सहायता उपलब्ध कराई है. इससे एक आतंकवादी संगठन को मदद की है.
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार यानी 31 जुलाई को जिन संस्थाओं पर कार्रवाई की, उनमें भारत स्थित स्कीज ट्रैवल्स एंड लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है. कंपनी के कार्यालय श्रीनगर और नई दिल्ली में हैं. ट्रेजरी विभाग के अनुसार, यह कंपनी महान एयर की जनरल सेल्स एजेंट के तौर पर काम कर रही थी.
ट्रेजरी सेक्रेटरी ने क्या कहा?
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अपने बयान में कहा जो भी व्यक्ति या संस्था IRGC या महान एयर को वित्तीय सेवाएं, लॉजिस्टिक्स या व्यावसायिक सहयोग दे रही है. वह एक आतंकवादी संगठन की मदद कर रही है. अमेरिकी सरकार ऐसी संस्थाओं की पहचान कर उन्हें बेनकाब करती रहेगी. उन्हें अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग करने की कार्रवाई करेगी.
भारत की कंपनी पर क्या आरोप?
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, स्कीज ट्रैवल्स ने साल 2020 से महान एयर के जनरल सेल्स एजेंट के रूप में काम करना शुरू किया था. कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर भी जिक्र किया है. अमेरिका का आरोप है कि कंपनी ने प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन के व्यावसायिक संचालन को समर्थन दिया.
महान एयर पर क्या आरोप हैं?
अमेरिका का कहना है कि महान एयर खुद को एक नागरिक विमानन कंपनी के रूप में पेश करती है, लेकिन लंबे समय से वह IRGC और उसकी कुद्स फोर्स की सहायता कर रही है. ट्रेजरी विभाग के अनुसार, एयरलाइन ने कथित तौर पर IRGC-कुद्स फोर्स के कर्मियों की यात्रा की व्यवस्था की, सैन्य प्रशिक्षण गतिविधियों में सहयोग दिया, ड्रोन (UAV) और हथियारों के परिवहन में मदद की.इन्हीं आरोपों के आधार पर अमेरिका पहले भी महान एयर पर कई प्रतिबंध लगा चुका है.
चीन और रूस की कंपनियां भी निशाने पर
अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में चीन और रूस की कंपनियां भी शामिल हैं. इनमें चीन की शंघाई विंग्स इंटरनेशनल लॉजिस्टिक कंपनी और शंघाई एलीट इंटरनेशनल ट्रैवेल कंपनी और रूस की कार्गो प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी शामिल है. इसके अलावा अमेरिका नेचीन के नागरिक तांग ज़न पर भी प्रतिबंध लगाया गया है. वह शंघाई विंग्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और शंघाई एलीट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और 50 प्रतिशत हिस्सेदार हैं.
अमेरिका ने इसके अलावा डाडेनेगर स्टार्टअप स्टूडियो को भी IRGC से जुड़ी एक कथित फ्रंट कंपनी करार देते हुए प्रतिबंधित किया है.अमेरिका के मुताबिक यह कंपनी एक वेबसाइट के जरिए अमेरिकी और इजरायली सैन्य उपकरणों की लोकेशन संबंधी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही थी, ताकि ईरानी सैन्य अभियानों में उसका इस्तेमाल किया जा सके.
क्या होगा प्रतिबंधों का असर?
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद इन संस्थाओं और व्यक्तियों की अमेरिका में मौजूद संपत्तियां फ्रीज हो जाएंगी. अमेरिकी नागरिकों और कंपनियों के लिए इनके साथ किसी भी तरह का लेनदेन प्रतिबंधित होगा. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और कारोबार पर भी इन प्रतिबंधों का असर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों का विश्व स्तर पर प्रभाव होता है.










