सिंगापुर में नए इंडिया हाउस की नींव, विदेश मंत्री जयशंकर ने बताई भारत की नई रणनीति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को सिंगापुर में भारतीय उच्चायोग के नए चांसरी कॉम्प्लेक्स की आधारशिला रखी. इस कार्यक्रम में सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन भी मौजूद रहे. जयशंकर ने कहा कि यह नया परिसर भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए दौर को दिखाएगा. साथ ही, इससे सिंगापुर में रहने वाले भारतीय समुदाय को बेहतर सेवाएं देने में मदद मिलेगी.
जयशंकर सिंगापुर में चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रीस्तरीय गोलमेज बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. यह बैठक गुरुवार को होगी. इससे पहले जयशंकर और बालाकृष्णन ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने और मौजूदा भू-राजनीतिक हालात पर विस्तार से बातचीत की. जयशंकर ने कहा कि वह गुरुवार की बैठक में भी सिंगापुर के विदेश मंत्री के साथ आगे चर्चा करेंगे.
सिंगापुर में कितने भारतीय?
सिंगापुर की 2020 की जनगणना के मुताबिक, भारतीय मूल के लोग देश की 40.4 लाख निवासी आबादी का करीब 9% हैं. इसके अलावा सिंगापुर में करीब 16.4 लाख विदेशी नागरिक रहते हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. सिंगापुर में रहने वाले भारतीयों में छात्र और वित्तीय सेवाओं, आईटी, निर्माण और समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले लोग शामिल हैं. तमिल सिंगापुर की चार आधिकारिक भाषाओं में से एक है. इसके अलावा अंग्रेजी, मंदारिन चीनी और मलय आधिकारिक भाषाएं हैं.
मंत्रीस्तरीय बैठक क्यों अहम?
भारत-सिंगापुर मंत्रीस्तरीय गोलमेज बैठक दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग बढ़ाने का प्रमुख मंच है. इसकी पहली बैठक सितंबर 2022 में नई दिल्ली में हुई थी. दूसरी अगस्त 2024 में सिंगापुर और तीसरी अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुई थी. चौथी बैठक में जयशंकर के अलावा वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी शामिल होंगे.
व्यापार और निवेश में सिंगापुर की अहमियत
भारत और सिंगापुर ने 2015 में अपने रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदला था. दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अलावा डिजिटल तकनीक, रक्षा-सुरक्षा, शिक्षा, कौशल और नई तकनीकों में सहयोग है. सिंगापुर ASEAN देशों में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. वह भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा सोर्स भी है. इसके अलावा सिंगापुर भारत के बाहरी वाणिज्यिक कर्ज और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बड़े स्रोतों में शामिल है.
2024-25 में सिंगापुर भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था. इस दौरान भारत ने सिंगापुर से 21.2 अरब डॉलर का सामान आयात किया और 14.4 अरब डॉलर का निर्यात किया. पिछले 10 साल में सिंगापुर का भारत में सालाना निवेश 10 से 15 अरब डॉलर के बीच रहा है. ऐसे में नए चांसरी कॉम्प्लेक्स की आधारशिला और मंत्रीस्तरीय बैठक दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम हैं.











