बच्चों की सुरक्षा से ऊपर मुनाफा? पूर्व कर्मी के खुलासे से और बढ़ सकती है मेटा की मुसीबत

Meta अभी लगातार विवाद में बना हुआ है. कंपनी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बड़े विवाद में घिर चुकी है. Meta अभी Facebook, Instagram, WhatsApp, Messenger और Threads जैसे प्लेटफॉर्म को चलाता है. हालांकि, इसी महीने यानी अगस्त 2026 में कंपनी से जुड़े दो बड़े मामले एक साथ सामने आए हैं. जिसकी वजह से कंपनी की परेशानी बढ़ गई है. अगर कंपनी पर आरोप साबित हो जाते हैं तो Facebook- Instagram जैसे प्लेटफॉर्म यूज करने का पूरा एक्सपीरियंस बदल जाएगा. भारत में भी कंपनी हाल में विवाद में रही है. आइए, आपको आसान भाषा में पूरा मामला समझाते हैं.
अमेरिका में 29 राज्यों की ओर से Meta पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और प्राइवेसी को नुकसान पहुंचाने वाले तरीके से प्लेटफॉर्म डिजाइन करने के आरोप लगाए गए हैं. जबकि भारत में Meta के विज्ञापन सिस्टम पर बाल यौन शोषण सामग्री यानी CSAM को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापन चलने का मामला सामने आया है. इन दोनों मामलों ने प्लेटफॉर्म डिजाइन, एल्गोरिदम, विज्ञापन सिस्टम, सेफ हार्बर और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर Meta की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
अमेरिका में Meta पर लगे गंभीर आरोप
अमेरिका में 29 राज्यों के गठबंधन ने Meta पर आरोप लगाया है कि कंपनी ने Facebook और Instagram के ऐसे फीचर्स तैयार किए, जिनका मकसद कम उम्र के यूजर्स को ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना था. आरोपों के मुताबिक, Meta के प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों में एंग्जायटी, डिप्रेशन और बॉडी इमेज से जुड़ी परेशानियों को बढ़ावा दे सकते हैं. बॉडी इमेज की परेशानी की वजह से यूजर अपने शरीर (रंग-आकार) को लेकर हीन भावना महसूस करता है.
हालांकि, कुछ मामलों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं और आत्महत्या के मामलों से भी प्लेटफॉर्म को जोड़ा गया है. इसके अलावा Meta पर अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर गुमराह करने और 13 साल से कम उम्र के बच्चों का पैरेंटल कंसेंट के बिना निजी डेटा कलेक्ट करने का भी आरोप है. ये अमेरिकी चिल्ड्रेन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट यानी COPPA के उल्लंघन से जुड़ा मामला है. पहले चरण में कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी के मामले ट्रायल में पहुंचे हैं. मामला ऑकलैंड की फेडरल अदालत में जज Yvonne Gonzalez Rogers के सामने चल रहा है.
भारत में CSAM विज्ञापनों ने बढ़ाई मुश्किल
भारत में Meta के लिए दूसरी बड़ी परेशानी CSAM विज्ञापनों से जुड़ी है. जुलाई 2026 में BBC की जांच में Instagram पर ऐसे पेड विज्ञापनों का पता चला, जिनमें “रेप वीडियो” और “चाइल्ड वीडियो” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, इन विज्ञापनों के जरिए यूजर्स को Telegram चैनलों तक पहुंचाया जाता था, जहां कथित तौर पर अवैध कंटेंट बेचे जा रहे थे.
अगस्त में WIRED की जांच में भी Meta के प्लेटफॉर्म पर ऐसे पेड विज्ञापनों का मामला सामने आया, जिनमें AI से तैयार की गई CSAM और नाबालिगों की यौन रूप से आपत्तिजनक तस्वीरें शामिल थीं. कुछ विज्ञापनों में AI आधारित “न्यूडिफाई” ऐप्स का भी प्रचार किया गया था. भारत सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए Meta से ऐसी सामग्री को तुरंत हटाने और पूरे मामले पर विस्तृत जवाब देने को कहा.
2021 से शुरू हुई Meta की मुश्किल
Meta की मौजूदा मुश्किलों की जड़ें कुछ साल पुरानी हैं. 2021 में Meta की पूर्व कर्मचारी Frances Haugen ने कंपनी के कई इंटरनल दस्तावेज पब्लिक किए थे. इसके बाद Wall Street Journal की फेसबुक फाइल्स रिपोर्ट और अमेरिकी सीनेट में Haugen की गवाही के दौरान कंपनी की अपनी रिसर्च से जुड़ी जानकारी सामने आई. इसमें Instagram के किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर और यूजर एंगेजमेंट तथा सुरक्षा के बीच कंपनी के सामने मौजूद तनाव पर सवाल उठे थे. इसके बाद अक्टूबर 2023 में 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने Meta के खिलाफ मुकदमा दायर किया.
न्यू मैक्सिको में Meta पर भारी जुर्माना
फरवरी-मार्च 2026 में न्यू मैक्सिको के एक मामले में ज्यूरी ने Meta को राज्य के कंज्यूमर प्रोटेक्शन लॉ के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार माना.
कंपनी पर 375 मिलियन डॉलर (लगभग 3500 करोड़ रुपये) का सिविल पेनल्टी लगाया गया, जो उस मामले में अधिकतम निर्धारित रकम थी. अगस्त 2026 में मामले के अगले चरण में जज ने Meta को Youth Mental Health Fund में अतिरिक्त 567 मिलियन डॉलर जमा करने और पांच साल तक प्लेटफॉर्म में सुधार से जुड़े कदम उठाने का आदेश दिया. इससे न्यू मैक्सिको में Meta की कुल देनदारी करीब 942 मिलियन डॉलर (करीब 9000 करोड़ रुपये) हो गई. हालांकि, Meta इस फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में है.
ऑकलैंड ट्रायल में Meta के पूर्व अधिकारी की गवाही
अगस्त 2026 को ऑकलैंड में चल रहे मल्टी-स्टेट ट्रायल में Meta के पूर्व इंजीनियरिंग डायरेक्टर Arturo Bejar ने गवाही दी. उन्होंने आरोप लगाया कि मार्क जकरबर्ग के नेतृत्व में कंपनी के कल्चर में बच्चों की सेफ्टी को ग्रोथ और एंगेजमेंट से कम प्राथमिकता दी गई. Bejar के मुताबिक, कुछ सेफ्टी रिसर्च को कमजोर किया जाता था और 13 साल से कम उम्र के यूजर्स को लेकर कंपनी का रवैया “न पूछो, न ही बताओ” जैसा था.
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ सेफ्टी टूल इस तरह बनाए गए थे कि वे प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पाते थे. Meta के वकीलों ने माना कि प्लेटफॉर्म पर कुछ समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन कंपनी की ओर से सुरक्षा पर किए जा रहे निवेश और लगातार किए जा रहे सुधारों पर जोर दिया गया.
भारत में ये मामला क्यों अहम है?
भारत Meta का सबसे बड़ा बाजार है. Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर देश में करोड़ों यूजर्स हैं. ऐसे में (बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री) CSAM विज्ञापनों का मामला Meta के विज्ञापन सिस्टम और एल्गोरिदम की निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है. भारत में IT एक्ट के सेक्शन 79 के तहत इंटरमीडियरी को मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा भी चर्चा में है.
भारतीय अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर किसी प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम या विज्ञापन सिस्टम अवैध सामग्री को एक्टिविली बढ़ावा देता या यूजर्स तक पहुंचाता है, तो कंपनी की सेफ हार्बर सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं. सिग्निफिकेंट सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज के लिए CSAM जैसे कंटेंट का पता लगाने और उसे रोकने को लेकर पहले से ही ज्यादा सख्त जिम्मेदारियां मौजूद हैं.
Meta ने दिया ये जवाब
Meta का कहना है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के खिलाफ उसकी जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी है. कंपनी के मुताबिक, उसने ऐसे करोड़ों कंटेंट हटाए हैं और AI आधारित नए डिटेक्शन सिस्टम भी तैयार किए हैं. कंपनी ये भी कहती है कि कुछ बच्चे अपनी उम्र गलत बताते हैं और कुछ किशोर प्लेटफॉर्म पर समय को कंट्रोल करने में परेशानी महसूस कर सकते हैं. Meta का कहना है कि वह इन समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार अपने सिस्टम में सुधार कर रही है.
फिलहाल अमेरिका में कंपनी का ट्रायल जारी है और इसके कई हफ्तों तक चलने की उम्मीद है. भारत में भी कंपनी जांच के घेरे में हैं. दोनों मामलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त जिम्मेदारी निभा रहे हैं, या यूजर एंगेजमेंट और कमाई अभी भी ज्यादा बड़ी प्राथमिकता है?











