छत्तीसगढ़ में बढ़ा महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन, एक साल में 51% की बढ़ोतरी

छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन कराने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने के बाद इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। 6 मई से 27 जुलाई 2026 के बीच महिलाओं के नाम 30 हजार 720 दस्तावेज पंजीकृत हुए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 20 हजार 319 था। इस तरह महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों में करीब 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी बढ़ी

पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 6 मई से 27 जुलाई 2025 के बीच कुल 63 हजार 174 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए थे। इनमें 20 हजार 319 दस्तावेज महिलाओं के नाम थे, यानी कुल पंजीकरण में महिलाओं की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी।

वहीं, वर्ष 2026 में इसी अवधि के दौरान कुल 74 हजार 424 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए। इनमें 30 हजार 720 दस्तावेजों में महिलाएं खरीदार थीं। इससे कुल पंजीकरण में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई। यानी एक साल में महिलाओं की हिस्सेदारी में 9 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है।

कई जिलों में तेजी से बढ़ा पंजीयन

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में यह वृद्धि प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिली है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, करीब 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में सालाना 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

रायपुर में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 4,220 से बढ़कर 6,038 हो गई। बिलासपुर में यह आंकड़ा 1,894 से बढ़कर 2,958 और जांजगीर-चांपा में 1,239 से बढ़कर 2,302 हो गया। इसके अलावा बालोद, कोरिया और कांकेर समेत कई अन्य जिलों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

76.95 करोड़ रुपये की मिली आर्थिक राहत

महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही 50 प्रतिशत की छूट से नागरिकों को सीधे आर्थिक लाभ भी मिला है। 6 मई से 27 जुलाई 2026 के बीच इस छूट के जरिए नागरिकों को 76 करोड़ 95 लाख 33 हजार 689 रुपये की आर्थिक राहत मिली। यह राशि करीब 76.95 करोड़ रुपये है।

महिला आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें परिवार तथा समाज में समान अवसर उपलब्ध कराना है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर 50 प्रतिशत की छूट इसी उद्देश्य से लागू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में बढ़ोतरी इस पहल के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास देने के साथ परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका को भी मजबूत करता है।

सामाजिक सोच में भी बदलाव

वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई वृद्धि प्रदेश में सामाजिक और आर्थिक सोच में सकारात्मक बदलाव का संकेत है। पंजीयन शुल्क में छूट से परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति दर्ज कराने के लिए प्रोत्साहन मिला है।

महिलाओं के बढ़ते संपत्ति स्वामित्व को आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे परिवार और समाज में महिलाओं की निर्णय लेने की भूमिका भी मजबूत होने की उम्मीद है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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