कृति सेनन के राखी विज्ञापन पर विवाद, कुत्ते को राखी बांधने पर काशी के विद्वानों ने जताई आपत्ति

रक्षाबंधन से पहले अभिनेत्री कृति सेनन का एक ज्वैलरी विज्ञापन चर्चा में आ गया है। विज्ञापन में कृति सेनन एक कुत्ते को राखी बांधती नजर आ रही हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वहीं, काशी के कुछ विद्वानों ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप नहीं बताया है।

विज्ञापन में कुत्ते को बांधी राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर जारी किए गए ज्वैलरी विज्ञापन में कृति सेनन एक कुत्ते को राखी बांधती दिखाई देती हैं। विज्ञापन सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इसे पालतू जानवरों के प्रति प्रेम और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बताया, जबकि कुछ लोगों ने धार्मिक परंपरा के साथ इस तरह के प्रयोग पर सवाल उठाए।

काशी के विद्वानों ने जताई आपत्ति

काशी के आचार्य पवन त्रिपाठी ने विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि रक्षाबंधन सनातन परंपरा से जुड़ा पर्व है और इसके मूल स्वरूप में रक्षा सूत्र का विशेष महत्व है। उनके अनुसार, पालतू जानवरों की देखभाल और उनसे प्रेम करना उचित है, लेकिन कुत्ते को राखी बांधने की परंपरा को रक्षाबंधन की धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में पुरोहित अपने यजमानों और गुरु अपने शिष्यों को रक्षा सूत्र बांधते थे। पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवासुर संग्राम के दौरान इंद्राणी ने इंद्र की विजय और रक्षा की कामना से उन्हें रक्षा सूत्र बांधा था। समय के साथ यही परंपरा भाई-बहन के रिश्ते में रक्षाबंधन के रूप में प्रमुख हो गई।

ज्योतिषाचार्य ने भी उठाए सवाल

ज्योतिषाचार्य डॉ. संजय उपाध्याय ने भी विज्ञापन को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने रक्षासूत्र से जुड़े पारंपरिक मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा सूत्र का धार्मिक संदर्भ विशेष परंपराओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में विज्ञापन के जरिए इसके स्वरूप में बदलाव किए जाने पर धार्मिक दृष्टि से सवाल उठना स्वाभाविक है।

रक्षाबंधन पर पढ़े जाने वाले मंत्र में कहा जाता है—“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः, तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।” इसका भाव रक्षा सूत्र के जरिए सुरक्षा और संकल्प की कामना से जुड़ा है।

क्या कुत्ते को राखी बांधना धर्म सम्मत है?

रक्षाबंधन की पारंपरिक धार्मिक परंपराओं में कुत्ते को राखी बांधने की कोई सर्वमान्य या अनिवार्य विधि नहीं बताई गई है। राखी को मुख्य रूप से रक्षा सूत्र के रूप में मनुष्यों को बांधने की परंपरा रही है और आधुनिक समय में यह भाई-बहन के रिश्ते का प्रमुख प्रतीक बन चुकी है।

हालांकि, पालतू जानवरों से प्रेम करना, उनकी देखभाल करना और उनके प्रति स्नेह जताना अलग विषय है। कुत्ते को राखी बांधने को लेकर विवाद मुख्य रूप से इस बात पर है कि क्या इसे रक्षाबंधन की धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर काशी के विद्वानों ने विज्ञापन पर आपत्ति जताई है।

jagjaahir desk

पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है।
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