हाथरस: त्रिभैरवनाथ सिद्ध पीठ मंदिर में धार्मिक कवि सम्मेलन का हुआ भव्य आयोजन, कवियों ने बांधा समां

हाथरस: हाथरस के रमनपुर रोड स्थित त्रिभैरवनाथ सिद्ध पीठ मंदिर परिसर में धार्मिक कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया.

कार्यक्रम का आयोजन साहित्य संगम “रजि” हाथरस द्वारा किया गया, जिसमें जिले व प्रदेश के ख्यातिलब्ध कवियों ने अपनी ओजपूर्ण और भावपूर्ण रचनाओं से समां बांध दिया.कार्यक्रम का शुभारंभ कवि दीपक रफी द्वारा मां शारदा की वंदना से हुआ। इसके पश्चात आशु कवि अनिल बौहरे ने वीर रस की रचना प्रस्तुत करते हुए कहा—
“सेवा संघर्ष में फौजी लगे रहते हैं,
88वें वर्ष में भी 18 बरस के लगते हैं।”
वरिष्ठ कवि श्याम बाबू ‘चिंतन’ ने शस्त्र-शास्त्र के संतुलन पर आधारित रचना सुनाई, वहीं डॉ. उपेंद्र झा ने सामाजिक यथार्थ को उजागर करते हुए कहा—
“उगते सूरज को नमस्कार किया जाता है,
दीपक को कोई तेल तक नहीं देता।”
कवि प्रदीप पंडित ने नववर्ष पर प्रेरणादायक रचना प्रस्तुत की, जबकि साहित्यकार विद्यासागर ‘विकल’ और गोपाल चतुर्वेदी की रचनाओं ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं.


इसके अलावा हरिशंकर सरस्वती ‘पं. हाथरसी’, आर.के. काकू, वैद्य मोहन, बृजेश रावत सहित कई कवियों ने काव्य पाठ किया.


कार्यक्रम के दौरान डॉ. विकास शर्मा ने वेद भगवान के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’ को शाल व प्रतीक चिन्ह भेंट कर आशीर्वाद लिया। इसी अवसर पर डॉ. विकास शर्मा को साहित्य संगम का संरक्षक मनोनीत किया गया.
साथ ही डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’ ने अध्यक्ष और डॉ. उपेंद्र झा ने महामंत्री पद का विधिवत पदभार ग्रहण किया.

योग पंडित अपने सहयोगियों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और डॉ. जितेंद्र स्वरूप शर्मा ‘फौजी’ को उनके 87वें जन्मदिवस पर शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया.
इसके साथ ही 48वीं भगवान परशुराम शोभायात्रा के आयोजकों को पीत पटिका व छवि चित्र भेंट कर सम्मान किया गया.
कार्यक्रम में उपस्थित सभी कवियों और अतिथियों को सम्मानित किया गया.
मंदिर परिसर में “धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो”, “विश्व का कल्याण हो”, बाबा भैरवनाथ, वेद भगवान और भगवान परशुराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया.


कार्यक्रम के सफल आयोजन में इंजीनियर देव स्वरूप शर्मा, कन्नू वर्मा और मंदिर के भक्तजनों की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने मंदिर परिसर को भव्य स्वरूप देने के साथ जलपान व्यवस्था भी की.
इन्हीं जयघोषों और काव्य रस के साथ धार्मिक कवि सम्मेलन का समापन हुआ.