‘गद्दारों’ की वजह से बैकफुट पर अमेरिका, हथियारों की कमी वाली रिपोर्ट बनी ईरान समझौते में बड़ा रोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जारी सैन्य तनाव के बीच हथियारों के घटते भंडार को लेकर लीक होती खबरों पर नाराजगी जाहिर की है. ट्रंप ने इस हफ्ते हुई कैबिनेट मीटिंग मेंहथियारों के भंडार से जुड़ी गोपनीय जानकारी मीडिया तक पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात भी कही है. उन्होंने ऐसे लोगों को देशद्रोही बताया है.
THAAD और Patriot मिसाइलों का स्टॉक चिंता का कारण
अमेरिकी हथियारों के भंडार को लेकर सबसे ज्यादा चिंता एयर डिफेंस सिस्टम की मिसाइलों को लेकर सामने आई है. CNN के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने अपने थाड मिसाइल भंडार का करीब 80 फीसदी हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है. वहीं, पैट्रियाट इंटरसेप्टर मिसाइलों के स्टॉक में भी लगभग 50 फीसदी की कमी आई है.
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक ईरान युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास पैट्रियट सिस्टम के दो आधुनिक संस्करणों की करीब 2,200 मिसाइलें और लगभग 452 THAAD मिसाइलें थीं. यह आंकड़े अमेरिका के लिए इसलिए चिंतित करने वाली बात, ये दोनों मिसाइलें हवाई हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाती हैं.
अमेरिका के घटते सैन्य भंडार से खाड़ी देशों की भी बढ़ी चिंता
अमेरिकी हथियारों के घटते भंडार का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है. खाड़ी देशों में भी इसे लेकर चिंता बढ़ रही है. सऊदी अरब और कतर समेत कई देश अपनी हवाई सुरक्षा के लिए अमेरिकी रक्षा प्रणालियों पर काफी निर्भर हैं.खाड़ी देशों को डर है कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और तेज करता है और इसके जवाब में ईरान मिसाइल या ड्रोन हमले करता है, तो अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम के भंडार में सीमित उपलब्धता उनके लिए चुनौती बन सकती है.
ट्रंप ने हथियारों की कमी के लिए बाइडेन को भी जिम्मेदार ठहरा चुके हैं
ट्रंप पहले भी अमेरिकी हथियारों के घटते भंडार के लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं. उनका आरोप है कि बाइडेन प्रशासन ने यूक्रेन को बड़ी मात्रा में हथियार भेजे, जिससे अमेरिकी स्टॉकपाइल पर दबाव पड़ा.लेकिन गाजा और यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिका ने इजरायल और यूक्रेन को बड़े पैमाने पर हथियार और मिसाइलें उपलब्ध कराई हैं, जिसके चलते उसके रक्षा उद्योग और हथियार भंडार पर भारी दबाव पड़ा है.
फिलहाल,अमेरिकी प्रशासन अब रक्षा कंपनियों से हथियारों का उत्पादन बढ़ाने के लिए कह रहा है. ट्रंप ने इसके लिए सैन्य हथियार बनाने वाली कंपनियों से मीटिंग भी की है है.इससे पहले मार्च में भी ट्रंप ने रक्षा कंपनियों के प्रमुखों के साथ बैठक की थी. इसके अलावा जुलाई में उन्होंने डिफेंस प्रोडक्शन का इस्तेमाल करते हुए रक्षा कंपनियों को अधिक हथियार बनाने के लिए बाध्य करने की प्रक्रिया शुरू की थी.











