डीजल चोरी के आरोपियों को थाने से छोड़ने पर कार्रवाई, बिलासपुर में एएसआई निलंबित

बिलासपुर में नेशनल हाईवे पर खड़े ट्रक और ट्रेलरों से डीजल चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मामले में पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि दबिश के दौरान पकड़े गए कुछ आरोपियों को थाने से छोड़ दिया गया। मामले की जानकारी सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कोनी थाना में पदस्थ एएसआई उमेश उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
पुलिस ने हाल ही में डीजल चोरी करने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से करीब 200 लीटर चोरी का डीजल, दो स्कॉर्पियो वाहन, डीजल निकालने में इस्तेमाल होने वाले पाइप और लोहे की छड़ बरामद की गई थी। पुलिस का दावा है कि गिरोह के तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें पुलिस की टीम ग्राम सेमरताल के भदौरियाखार क्षेत्र में दबिश देकर कई संदिग्धों को हिरासत में लेते दिखाई दे रही है। वीडियो में कुछ लोगों के हाथों में हथकड़ी भी नजर आई। बाद में आरोप लगा कि हिरासत में लिए गए बैसाखू लोनिया, राजेश लोनिया, राजू लोनिया और एक महिला को बिना किसी कार्रवाई के थाने से छोड़ दिया गया। वायरल वीडियो में पुलिस पर लेनदेन के भी आरोप लगाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार 11 जुलाई को एक ट्रेलर मालिक ने कोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि रायपुर से सिंगरौली जाते समय उसके वाहन से करीब 150 लीटर डीजल चोरी कर लिया गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद सूचना मिलने पर पुलिस ने गतौरी क्षेत्र में घेराबंदी कर कार्रवाई की और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवप्रसाद उर्फ छोटू लोनिया निवासी अनूपपुर (मध्यप्रदेश) और भानु प्रसाद लोनिया निवासी भदौरियाखार, बिलासपुर के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया है।
मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को जानकारी मिली कि कार्रवाई के दौरान हिरासत में लिए गए सभी संदिग्धों के खिलाफ समान कार्रवाई नहीं की गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एएसआई उमेश उपाध्याय ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किए बिना तीन आरोपियों को छोड़ दिया। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए एसएसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया है। साथ ही मामले की प्रारंभिक जांच के लिए सीएसपी कोतवाली गगन कुमार को सात दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।











